बिलासपुर में फर्जी वसीयतनामा से करोड़ों की संपत्ति हड़पने का आरोप, मस्तूरी थाने में FIR; आरोपी को छोड़ने की चर्चा से उठे सवाल ?
बिलासपुर (Bilaspur)। जिले के मस्तूरी थाना में दिवंगत बुजुर्ग की करोड़ों रुपये की बेशकीमती पैतृक एवं स्वअर्जित संपत्ति को कथित रूप से फर्जी वसीयतनामा तैयार कर हड़पने का मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर मस्तूरी पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
मामला सामने आने के बाद अब केवल कथित फर्जी वसीयतनामा ही नहीं, बल्कि पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि मामले से जुड़े एक आरोपी को पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और बाद में उसे छोड़ दिया गया। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
गंभीर बीमारी से पीड़ित बुजुर्ग की स्थिति का फायदा उठाने का आरोप
मस्तूरी थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, श्रीमती कृष्णा दुआ (70 वर्ष), निवासी लिंक रोड, बिलासपुर ने पुलिस को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में बताया गया है कि उनके बड़े भाई स्व. बृजमोहन दुआ गंभीर रूप से पार्किंसन बीमारी से पीड़ित थे और उनकी मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बुजुर्ग की गंभीर बीमारी और असहाय स्थिति का कथित रूप से फायदा उठाते हुए अंचल जुनेजा, निवासी तिवारी चाल, जरहाभाठा एवं दुर्गेश नंदनी, निवासी कुम्हारपारा, जरहाभाठा ने आपस में मिलकर कथित रूप से षड्यंत्र रचा।
आरोप के मुताबिक, दोनों ने बिलासपुर के बजाय उप-पंजीयक कार्यालय मस्तूरी में कथित रूप से वसीयतनामा तैयार कराया, जिसे शिकायतकर्ता ने फर्जी और कूटरचित बताया है। इस दस्तावेज के माध्यम से अमेरी, तोरवा, जूना बिलासपुर, मंगला और चोरमढ़ी स्थित बेशकीमती पैतृक एवं स्वअर्जित जमीनों पर अधिकार हासिल करने का प्रयास किए जाने का आरोप लगाया गया है।
न्यायालयीन आदेशों का भी शिकायत में उल्लेख
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी दुर्गेश नंदनी की ओर से पूर्व में स्व. बृजमोहन दुआ को पिता घोषित किए जाने के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की गई थी, जिसे न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने का दावा किया गया है।
इसके अलावा, संबंधित संपत्तियों के हस्तांतरण को लेकर व्यवहार न्यायालय द्वारा स्थगन/निषेधाज्ञा (Injunction) आदेश दिए जाने का भी शिकायत में उल्लेख है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन न्यायालयीन परिस्थितियों के बावजूद कथित कूटरचित दस्तावेज के जरिए संपत्ति पर अधिकार स्थापित करने का प्रयास किया गया।
गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज
मस्तूरी पुलिस ने शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के विरुद्ध भा.दं.सं. की धारा 420, 467, 468, 471, 120-B एवं 34 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की है।
अब पुलिस की जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि कथित वसीयतनामा वास्तव में किस परिस्थिति में तैयार हुआ, उसमें इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की सत्यता क्या है, पंजीयन की प्रक्रिया कैसे हुई और संबंधित संपत्तियों पर अधिकार हासिल करने के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।
एक आरोपी को हिरासत में लेकर छोड़ने की चर्चा, पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
एफआईआर दर्ज होने के बाद क्षेत्र में यह चर्चा भी तेजी से फैल रही है कि पुलिस ने मामले से जुड़े एक आरोपी को पूछताछ अथवा कार्रवाई के लिए हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में उसे कथित रूप से थाने से ही छोड़ दिया गया।
यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि वास्तव में किसी आरोपी को पुलिस ने हिरासत में लिया था और बाद में उसे छोड़ दिया गया, तो उसे छोड़ने का आधार क्या था? क्या पुलिस ने पूछताछ के बाद उसे छोड़ने का कोई कानूनी निर्णय लिया या इसके पीछे कोई अन्य कारण था?
चूंकि इस संबंध में अभी तक पुलिस की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इस पूरे घटनाक्रम पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन यदि आरोपी को वास्तव में थाने से छोड़ा गया है, तो गंभीर धाराओं में दर्ज इस मामले की कार्रवाई और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
थाना प्रभारी से संपर्क का प्रयास, नहीं मिला पुलिस का पक्ष
मामले की वास्तविक स्थिति और आरोपी को कथित रूप से हिरासत में लेकर छोड़े जाने की चर्चा को लेकर मस्तूरी थाना प्रभारी का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया। फोन किए जाने के बावजूद थाना प्रभारी द्वारा कॉल रिसीव नहीं किया गया। बाद में भी उनकी ओर से कोई कॉल बैक प्राप्त नहीं हुआ।
ऐसे में इस खबर के प्रकाशन के समय तक पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ सका है। पुलिस का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
कहीं किसी और को तो नहीं बनाया गया निशाना?
इस पूरे मामले में अब एक और बड़ा सवाल सामने आता है—क्या यह केवल एक संपत्ति और एक परिवार तक सीमित मामला है, या आरोपियों द्वारा इससे पहले भी किसी अन्य व्यक्ति अथवा परिवार को इसी तरह निशाना बनाया गया है?
यदि कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेशकीमती संपत्ति पर अधिकार हासिल करने का प्रयास जांच में सही पाया जाता है, तो पुलिस के लिए यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि संबंधित लोगों के पुराने रिकॉर्ड क्या हैं और क्या उनके खिलाफ पहले भी इसी तरह की कोई शिकायत, संपत्ति विवाद या दस्तावेजों से जुड़ा मामला सामने आया है?
क्या किसी अन्य बुजुर्ग, संपत्ति मालिक या परिवार को भी इसी तरह निशाना बनाया गया है? क्या ऐसे और दस्तावेज सामने आ सकते हैं? और क्या इस मामले के पीछे केवल दो लोग हैं या इसके तार कहीं और तक जुड़े हैं?
इन सवालों के जवाब अब पुलिस की निष्पक्ष और विस्तृत जांच से ही सामने आएंगे।
फिलहाल मामला विवेचना में है और आरोपों की अंतिम सत्यता जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। The YUVA WORLD News इस मामले में पुलिस की आगामी कार्रवाई, आधिकारिक पक्ष और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर नजर बनाए हुए है।







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