CG News: केशकाल में लगी देवी-देवताओं की अदालत, भंगाराम माई के दरबार में 35 को सजा!
कोंडागांव/केशकाल। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के केशकाल में आदिम संस्कृति, आस्था और लोकपरंपरा से जुड़ी एक अनोखी परंपरा आज भी जीवंत है। यहां भादो जात्रा के दौरान भंगाराम माई के दरबार में इंसानों की नहीं, बल्कि मान्यता के अनुसार देवी-देवताओं की अदालत लगती है।
क्षेत्र के नौ परगना से देवी-देवता अंगा, डाग और डोली के रूप में अपने पुजारी, सिरहा, गुनिया, मांझी, चालकी और गायता-मुखिया के साथ इस दरबार में हाजिरी लगाते हैं। इस दौरान सालभर में देवी-देवताओं से जुड़े कार्यों का लेखा-जोखा लिए जाने की परंपरा है।
भंगाराम माई के दरबार में होती है देवी-देवताओं की ‘सुनवाई’
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी देवी-देवता के क्षेत्र में विघ्न-बाधा उत्पन्न होने या लोगों को परेशानी होने की शिकायत सामने आती है, तो भंगाराम माई के दरबार में उसके कारणों और दोषों की समीक्षा की जाती है। परंपरा के अनुसार इसके बाद संबंधित देवी-देवता के लिए दंड या सजा निर्धारित की जाती है।
यह पूरी प्रक्रिया स्थानीय आदिवासी संस्कृति, आस्था और सदियों पुरानी मान्यताओं से जुड़ी हुई मानी जाती है। इसमें ग्रामीण और श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।
नौ परगना के देवी-देवता दरबार में हुए शामिल
केशकाल के तेलीन सती माई मंदिर के समीप और टाटामारी पर्यटन मार्ग पर स्थित भंगाराम देवी के दरबार में आयोजित भादो जात्रा में इस वर्ष भी नौ परगना के देवी-देवताओं की उपस्थिति रही।
परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की मान्यताओं के आधार पर देवी-देवताओं के कार्यों की समीक्षा की गई। इसी दौरान इस वर्ष 35 देवी-देवताओं को सजा सुनाए जाने की बात सामने आई है।
क्या है भंगाराम माई की अदालत की परंपरा?
भंगाराम माई के दरबार से जुड़ी यह परंपरा क्षेत्र की लोकआस्था और आदिवासी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। यहां देवी-देवताओं को भी समुदाय के प्रति अपने दायित्वों और कार्यों के आधार पर परखा जाता है।
भादो जात्रा के दौरान आयोजित यह अनोखा धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन छत्तीसगढ़ की विविध लोकपरंपराओं और आदिम संस्कृति की एक अलग तस्वीर प्रस्तुत करता है।
आस्था और संस्कृति का अनोखा संगम
केशकाल की भंगाराम माई से जुड़ी यह परंपरा बताती है कि बस्तर अंचल में धार्मिक आस्था केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन से भी गहराई से जुड़ी हुई है। देवी-देवताओं की अदालत की यह मान्यता आज भी स्थानीय समुदाय के बीच अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।
नोट: देवी-देवताओं की अदालत और सजा से संबंधित विवरण स्थानीय आस्था, मान्यता और परंपरा पर आधारित हैं।
The YUVA WORLD News






Average Rating
More Stories
छत्तीसगढ़ में गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत! PM Awas Yojana Urban की कट-ऑफ डेट बदली
बिलासपुर (Bilaspur): शराब पीने के लिए पैसे मांगे, नहीं देने पर मारपीट और चाकूनुमा हथियार से हमला; आरोपी गिरफ्तार
Bilaspur News: ‘महोत्सव के नाम पर सियासत, बेलतरा की मूलभूत समस्याएं जस की तस’—अंकित गौरहा