Bilaspur News: ‘महोत्सव के नाम पर सियासत, बेलतरा की मूलभूत समस्याएं जस की तस’—अंकित गौरहा
बिलासपुर/बेलतरा। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में सड़कों की बदहाल स्थिति और मूलभूत सुविधाओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब नगपुरा मेला महोत्सव का नाम बदलकर ‘बेलतरा महोत्सव’ किए जाने का मुद्दा भी चर्चा में है। कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने महोत्सव के नाम परिवर्तन और मुख्यमंत्री द्वारा आयोजन के लिए की गई 30 लाख रुपये की घोषणा को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।
नगपुरा मेला महोत्सव के नाम परिवर्तन पर सवाल
अंकित गौरहा ने कहा कि नगपुरा मेला महोत्सव क्षेत्र की पुरानी और महत्वपूर्ण परंपरा रही है। उनके अनुसार, यह आयोजन लंबे समय से होता आ रहा है और पहले करीब सात दिनों तक आयोजित किया जाता था। गौरहा का आरोप है कि अब इसका नाम बदलकर ‘बेलतरा महोत्सव’ कर दिया गया है और आयोजन की अवधि भी कम कर दी गई है।
गौरहा के मुताबिक, स्थानीय ग्रामवासियों और क्षेत्रवासियों की ओर से पहले भी नाम परिवर्तन को लेकर आपत्ति जताई गई थी। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक और क्षेत्र की भावनाओं से जुड़े आयोजन की पहचान को बनाए रखा जाना चाहिए।
‘चाहें तो हर महीने एक महोत्सव करा दें’
कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री द्वारा बेलतरा महोत्सव के लिए 30 लाख रुपये की घोषणा पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को महोत्सव आयोजित करने में इतनी रुचि है तो मुख्यमंत्री चाहें तो और 3 करोड़ 30 लाख रुपये की घोषणा कर दें, जिससे विधानसभा क्षेत्र में हर महीने एक नया महोत्सव आयोजित किया जा सके।
गौरहा ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि इससे शायद क्षेत्रवासी कुछ समय के लिए सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत समस्याओं को भूल जाएं।
मुख्यमंत्री की घोषणा पर भी उठाए सवाल
अंकित गौरहा ने कहा कि बेलतरा महोत्सव के लिए घोषणा तो की गई, लेकिन क्षेत्र की जनता की भावनाओं को समझने की कोशिश नहीं की गई। उन्होंने कहा कि लोगों को महोत्सव से आपत्ति नहीं है, बल्कि आपत्ति पारंपरिक आयोजन की पहचान और नाम बदलने को लेकर है।
उन्होंने सरकार से नगपुरा मेला महोत्सव की ऐतिहासिक पहचान और परंपरा को बरकरार रखने की मांग की।
सड़क और मूलभूत सुविधाओं को लेकर भाजपा पर निशाना
गौरहा ने कहा कि एक तरफ बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में अशोक नगर-बिरकोना मार्ग, राजकिशोर नगर चौक से छठ घाट मार्ग और सेंदरी-मोपका बायपास जैसे महत्वपूर्ण मार्गों की बदहाली लोगों की परेशानी बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर महोत्सवों के लिए घोषणाएं की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि बेलतरा की जनता को आयोजन और घोषणाओं से ज्यादा अच्छी सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है। उनके मुताबिक सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को यह तय करना चाहिए कि प्राथमिकता महोत्सव है या जनता की बुनियादी समस्याओं का समाधान।
क्या है पूरा विवाद?
नगपुरा मेला महोत्सव का नाम बदलकर बेलतरा महोत्सव किए जाने को लेकर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने सवाल उठाए हैं। वहीं, उनका कहना है कि क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं का समाधान भी प्राथमिकता के साथ होना चाहिए। इस पूरे मामले में महोत्सव के आयोजन, नाम परिवर्तन और विकास कार्यों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है।






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