बिलासपुर | The YUVA WORLD News
छत्तीसगढ़ सरकार ने डामर (बिटुमिन) की कीमतों में असाधारण वृद्धि को देखते हुए 27 अक्टूबर 2026 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में पात्र सड़क निर्माण, नवीनीकरण और संधारण कार्यों के अनुबंधकों को मूल्य राहत देने का निर्णय लिया है। लेकिन बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की बदहाल सड़कों और नगर निगम क्षेत्र के सड़क निर्माण कार्यों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस नेता एवं जिला पंचायत सभापति अंकित गौरहा ने क्षेत्र की सड़कों की स्थिति, निर्माण में देरी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।
कैबिनेट ने डामर की बढ़ती कीमतों पर लिया फैसला
मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार, छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के अंतर्गत संचालित कार्यों में 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक अनुबंधकों द्वारा वास्तव में खरीदे और उपयोग किए गए डामर की मात्रा के आधार पर 130.88 करोड़ रुपये की राहत देने का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा, लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत राज्य वित्तपोषित सड़क निर्माण, नवीनीकरण एवं संधारण कार्यों के ऐसे अनुबंध, जिनकी निविदाएं 1 अप्रैल 2026 से पहले प्राप्त हुई थीं, उनमें 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 के बीच खरीदे और उपयोग किए गए डामर पर भी मूल्य राहत देने का निर्णय लिया गया है। इस पर लगभग 70 से 100 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त व्यय का अनुमान बताया गया है।
सरकार के इस फैसले का उद्देश्य डामर की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण प्रभावित पात्र सड़क निर्माण कार्यों को गति देना और उन्हें निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने में मदद करना है। हालांकि, नगर निगम क्षेत्र की सड़कों के लिए इसी निर्णय में अलग राहत का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। ऐसे में बेलतरा क्षेत्र की सड़कों को लेकर सवाल और गंभीर हो जाते हैं।
बेलतरा की इन सड़कों का समाधान आखिर कब?
कांग्रेस नेता एवं जिला पंचायत सभापति अंकित गौरहा ने बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की कई सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं। उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों में प्रमुख रूप से ये सड़कें शामिल हैं:
– अशोक नगर से बिरकोना पहुंच मार्ग — लगभग 17 करोड़ रुपये
– गुरुनानक चौक से राजकिशोर नगर पहुंच मार्ग — लगभग 9 करोड़ रुपये
– अपोलो चौक से रपटा पहुंच मार्ग — लगभग 10 करोड़ रुपये
– साइंस कॉलेज से सब्जी मंडी पहुंच मार्ग — लगभग 3 करोड़ रुपये
– बायपास सहित क्षेत्र की अन्य सड़कें, जिनकी स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
अंकित गौरहा का कहना है कि क्षेत्र की सड़कों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। सड़क निर्माण की स्वीकृति, भूमिपूजन, निरीक्षण और परीक्षण की बातें तो सामने आती रही हैं, लेकिन आम जनता को यह स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा कि निर्माण कार्य आखिर कब पूरा होगा।
अशोक नगर-बिरकोना मार्ग के हस्तांतरण पर भी सवाल
अंकित गौरहा ने अशोक नगर से बिरकोना पहुंच मार्ग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उपलब्ध कराई गई विज्ञप्ति के अनुसार, यह सड़क पहले लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत थी, जिसे बाद में नगर निगम को हस्तांतरित किया गया। आरोप है कि इसके बाद सड़क निर्माण का मामला विवादित हो गया और काम पूरा होने में देरी हुई।
इस मामले में सड़क हस्तांतरण के निर्णय, वर्तमान जिम्मेदार विभाग, निर्माण की समय-सीमा और ठेकेदारों के भुगतान की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। संबंधित विभागों के रिकॉर्ड सामने आने से यह पता चल सकेगा कि निर्माण कार्य में देरी की वास्तविक वजह क्या है और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।
“मेवा सदन की संस्कृति हावी”—अंकित गौरहा का आरोप
बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस नेता एवं जिला पंचायत सभापति अंकित गौरहा ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में “मेवा सदन की संस्कृति” हावी है। उनका कहना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को व्यक्तिगत स्वार्थ के बजाय आम जनता की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
अंकित गौरहा ने सवाल उठाया कि जब पिछले कई वर्षों से सड़कों की स्वीकृति, भूमिपूजन, निरीक्षण और परीक्षण की प्रक्रिया की चर्चा हो रही है, तो निर्माण कार्य पूरा क्यों नहीं हुआ? उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़कों के निर्माण और मरम्मत की स्पष्ट समय-सीमा चाहिए।
ये आरोप अंकित गौरहा के बयान पर आधारित हैं। संबंधित जनप्रतिनिधियों और विभागों का पक्ष सामने आने पर मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
आम जनता की परेशानी और जवाबदेही का सवाल
खराब सड़कों के कारण लोगों को रोजाना आवागमन में परेशानी और दुर्घटना का खतरा होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में सड़क निर्माण और मरम्मत की जिम्मेदारी संभालने वाले विभागों को प्रत्येक मार्ग की वर्तमान स्थिति, स्वीकृत राशि, ठेकेदारों के भुगतान, काम की प्रगति और निर्धारित समय-सीमा स्पष्ट करनी चाहिए।
कैबिनेट ने डामर की बढ़ती कीमतों के बीच पात्र अनुबंधों को राहत देने का फैसला लिया है। अब सवाल यह है कि बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की बदहाल सड़कों को लेकर संबंधित विभाग क्या कदम उठाएंगे? नगर निगम क्षेत्र की सड़कों के लिए क्या समाधान निकलेगा? और स्थानीय जनता को सुरक्षित आवागमन के लिए अच्छी सड़कें कब मिलेंगी?
अंकित गौरहा द्वारा उठाए गए सवालों के बीच अब निगाहें संबंधित विभागों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के जवाब पर हैं। क्षेत्र की जनता को सड़क निर्माण के लिए ठोस कार्ययोजना और समयबद्ध कार्रवाई का इंतजार है।
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