खैरासेतगंगा धाम समिति विवाद गहराया, शिक्षक शत्रुहन टोंडर के खिलाफ शिकायत; 50 लाख के सामुदायिक भवन निर्माण पर उठे सवाल
मानव सतनाम कल्याण समिति ने कलेक्टर, एसपी, जिला शिक्षा अधिकारी और एसडीएम से की शिकायत,
पंजीयन से लेकर निर्माण स्थल तक के विवाद की निष्पक्ष जांच की मांग
मुंगेली, छत्तीसगढ़ | The YUVA WORLD News
मुंगेली जिले के ग्राम खैरासेतगंगा स्थित गुरु घासीदास मंदिर एवं सेतगंगा धाम की समिति को लेकर
विवाद गहराता नजर आ रहा है। मानव सतनाम कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने गांव के शिक्षक
शत्रुहन टोंडर पर समिति के कामकाज में कथित हस्तक्षेप करने, समाज में भ्रम की स्थिति पैदा करने
और सामुदायिक भवन निर्माण को लेकर विवाद उत्पन्न करने के आरोप लगाए हैं।
इस संबंध में समिति के पदाधिकारियों ने कलेक्टर मुंगेली, पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी
और एसडीएम को शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में समिति के पंजीयन, नई कार्यकारिणी के गठन, सामुदायिक भवन निर्माण और पूर्व में हुए
कथित समझौते से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।
समिति के पंजीयन को लेकर विवाद
समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, खैरासेतगंगा धाम में लंबे समय से सामाजिक एवं धार्मिक
गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। पूर्व में समिति के अध्यक्ष रहे शत्रुहन टोंडर के कार्यकाल
के दौरान समिति के पंजीयन की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
पदाधिकारियों का आरोप है कि समिति के नाम से अलग नाम पर पंजीयन कराया गया। बाद में पंजीयन
प्रमाणपत्र एवं नियमावली की मांग करने पर उन्हें दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। हालांकि,
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पंजीयन से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही
इस संबंध में वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सामाजिक सहमति से नई कार्यकारिणी के गठन का दावा
पदाधिकारियों का कहना है कि पंजीयन संबंधी विवाद के बाद सामाजिक बैठक आयोजित की गई, जिसमें
पूर्व समिति को भंग करने और नई समिति गठित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इसके बाद समाज
के वरिष्ठजनों, राजमहंतों एवं अन्य पदाधिकारियों के अनुरोध पर भंडारपुरी धाम के राजा
गुरु धर्मगुरु बालदास साहेब की उपस्थिति में नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया संपन्न हुई।
समिति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, विधायक पुन्नूलाल मोहले, पूर्व विधायक चंद्रभान
बारमते और चुरावन मंगेशकर सहित अन्य लोगों को संरक्षक मंडल में शामिल किया गया है।
वहीं, मानिकलाल सोनवानी को अध्यक्ष, सुखचंद भास्कर को सचिव तथा देवचंद भास्कर को
कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने की जानकारी दी गई है।
नई कार्यकारिणी के गठन और समिति के पंजीयन की वर्तमान वैधानिक स्थिति को संबंधित दस्तावेजों
के आधार पर स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण होगा।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद 50 लाख के सामुदायिक भवन पर विवाद
समिति के पदाधिकारियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के खैरासेतगंगा धाम आगमन के दौरान
सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये और मेले के आयोजन के लिए प्रतिवर्ष
10 लाख रुपये देने की घोषणा की गई थी। इसके बाद समिति द्वारा मेले का आयोजन भी किया गया।
पदाधिकारियों का दावा है कि आयोजन से संबंधित आय-व्यय का विवरण समाज के सामने रखा गया।
इसी बीच सामुदायिक भवन निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। समिति का आरोप है कि शिक्षक
शत्रुहन टोंडर द्वारा कुछ लोगों के साथ अलग से बैठक कर निर्माण स्थल को लेकर विवाद की
स्थिति पैदा की जा रही है। समिति ने आशंका जताई है कि इससे समाज के भीतर तनाव बढ़ सकता है
और अन्य समाजों के साथ भी विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
भवन निर्माण की घोषणा, स्वीकृत राशि, निर्माण स्थल और संबंधित विभाग की भूमिका के संबंध
में आधिकारिक दस्तावेजों से स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
विवादित स्थल को लेकर पुराने समझौते का हवाला
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि संबंधित स्थल को लेकर पहले भी सतनामी समाज और अन्य
समाज के बीच विवाद की स्थिति बनी थी। उनके अनुसार, उस समय कलेक्टर एवं एसडीएम कार्यालय
में लिखित सहमति बनी थी कि उक्त स्थान धार्मिक कार्यक्रमों के लिए सुरक्षित रहेगा और
वहां किसी भी समाज द्वारा निर्माण कार्य नहीं कराया जाएगा।
समिति का आरोप है कि अब इसी स्थल पर मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत सामुदायिक भवन निर्माण
को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है। पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि यदि निर्माण स्थल को
लेकर पहले से सहमति बनी हुई थी, तो पूर्व में जिम्मेदारी संभालने वाले लोगों द्वारा उस
समय इस दिशा में क्या कदम उठाए गए थे।
इस पुराने समझौते की वास्तविक शर्तें, उसकी वैधानिक स्थिति और संबंधित भूमि के राजस्व
अभिलेखों की जांच से विवाद के प्रमुख बिंदुओं को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।
कलेक्टर, एसपी और शिक्षा विभाग से जांच की मांग
मानव सतनाम कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने पूरे मामले की जांच कर तथ्यों के आधार पर
उचित कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत में समिति के पंजीयन, कार्यकारिणी के गठन,
सामुदायिक भवन निर्माण और पुराने समझौते से जुड़े बिंदुओं की जांच कराने का आग्रह किया गया है।
समिति ने समाज के लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें
और आपसी सौहार्द बनाए रखें। पदाधिकारियों का कहना है कि विवाद का समाधान प्रशासनिक जांच
और दस्तावेजों के आधार पर होना चाहिए।
- समिति के पंजीयन और नियमावली की वास्तविक स्थिति क्या है?
- नई कार्यकारिणी के गठन से संबंधित दस्तावेज क्या कहते हैं?
- 50 लाख रुपये के सामुदायिक भवन की घोषणा के तहत निर्माण स्थल कौन-सा निर्धारित है?
- क्या संबंधित भूमि को लेकर पहले कोई लिखित समझौता हुआ था?
- प्रशासन शिकायत की जांच कर विवाद का समाधान कैसे करेगा?
फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने
आना बाकी है। प्रशासनिक जांच तथा पंजीयन, भूमि और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा
के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।






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