कोरबा। शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत अध्ययनरत बच्चों को डीपीएस स्कूल एनटीपीसी, जमनीपाली से जबरन निकाले जाने का मामला सामने आया है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन द्वेषपूर्ण रवैया अपनाते हुए इन बच्चों को बाहर कर रहा है और दोबारा प्रवेश के लिए एक लाख रुपये जमा करने का दबाव बना रहा है।

इस संबंध में अभिभावकों ने जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के जिलाध्यक्ष जैनेन्द्र कुर्रे को शिकायत पत्र सौंपा, जिसके आधार पर उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को पत्र लिखकर त्वरित कार्यवाही की मांग की है।
गरीब माता-पिता और बच्चों पर अत्याचार
अभिभावकों ने बताया कि स्कूल प्रशासन न सिर्फ बच्चों को जबरन बाहर कर रहा है, बल्कि उन्हें सरकार द्वारा प्रदत्त शिक्षा उपयोगी सामग्री भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रबंधन शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 का खुला उल्लंघन कर रहा है और गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है।

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
जैनेन्द्र कुर्रे ने अपने पत्र में लिखा है कि यदि इस मामले में जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तो वे इसे लेकर उच्चस्तरीय शिकायत दर्ज कराएंगे और लोकतांत्रिक तरीके से संवैधानिक लड़ाई लड़ने के लिए बाध्य होंगे।
प्रशासन और शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल
यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्या प्रशासन इस पर जल्द कोई कार्रवाई करेगा या फिर गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित करने के इस गंभीर मामले को नजरअंदाज किया जाएगा?
इस मामले पर आगे की अपडेट के लिए जुड़े रहें The YWN News के साथ।





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