केवीके कर्मचारियों का IGKV में जोरदार प्रदर्शन: 7 सूत्रीय मांगों को लेकर चेताया अनिश्चितकालीन आंदोलन
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय बिलासपुर में केवीके तकनीकी कर्मचारी संघ ने संवैधानिक अधिकारों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। 7 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा, चेतावनी – मांगे नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन कामबंदी शुरू होगी।
बिलासपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तकनीकी कर्मचारी संघ (TSA) के नेतृत्व में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सेवा शर्तों, भत्तों, और सेवानिवृत्ति आयु जैसे मुद्दों को लेकर 7 सूत्रीय मांग पत्र कुलपति को सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर पैदल मार्च करते हुए नारेबाजी की और कुलपति के कक्ष का घेराव कर घंटों तक भूखे-प्यासे बैठे रहे।

आंदोलन की प्रमुख बातें:
- पिछले 8 महीनों से सैलरी नहीं मिली, जबरन कम वेतन दिया गया।
- सेवा शर्तों में भेदभाव: IGKV स्टाफ होकर भी ICR अधीन दर्शाना गुमराह करने जैसा।
- कंट्रोलर उमेश अग्रवाल पर पक्षपात और आतंक का आरोप।
- भविष्य में अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल की चेतावनी।
संघ की 7 सूत्रीय मांगें:
- सेवा शर्तों एवं वेतनमान की IGKV समतुल्यता की बहाली
- NPS/OPS का पुनः क्रियान्वयन
- मेडिकल व अन्य भत्तों की पुनर्बहाली
- CAS/उच्च वेतनमान योजनाओं की पुनः स्थापना
- सेवा-निवृत्ति आयु को 65/62 वर्ष करना
- पेंशन, ग्रेच्युटी व अन्य सेवानिवृत्त लाभों की गारंटी
- स्थायी नियुक्तियों से पूर्व सभी लंबित समस्याओं का समाधान

संघ के नेताओं के बयान:
डॉ. पी. के. सांगोड़े (संघ अध्यक्ष) ने कहा, “हम वर्षों से संवाद कर रहे हैं, परंतु अब आंदोलन ही एकमात्र रास्ता है।”
डॉ. ईश्वरी साहू (उपाध्यक्ष) ने कहा, “यह केवल सुविधाओं की नहीं, संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई है।”
डॉ. गजेंद्र चंद्राकर ने कहा, “KVK स्टाफ को 60 में रिटायर करना कानून और IGKV अधिनियम दोनों के विरुद्ध है।”
कुलपति से घंटों चली वार्ता:
कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने मीटिंग में कर्मचारियों से विस्तार से चर्चा की और आश्वासन दिया कि “कल तक मांगों पर कार्यवाही संमत पत्र जारी किया जाएगा”। संघ ने दो टूक कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो राज्यव्यापी, चरणबद्ध और लोकतांत्रिक अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा।

विरोध में लगे नारे:
- “कंट्रोलर हटाओ, IGKV बचाओ”
- “हमारा अधिकार, नहीं सहेंगे अत्याचार”
- “भेदभाव बंद करो, सम्मान दो”
संघ की चेतावनी:
संघ ने स्पष्ट किया कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो प्रदर्शन सिर्फ शुरुआत है, अगला कदम होगा कामबंद हड़ताल। इससे उत्पन्न होने वाली सभी अकादमिक, अनुसंधान व प्रशासनिक बाधाओं की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
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