बैकुंठपुर। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के द्वारा 31 दिसंबर 2024 को कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के महलपारा स्थित शर्मा अस्पताल के संचालक डॉ. राकेश शर्मा के एनेस्थीसिया डिप्लोमा की जांच के लिए दो सदस्य टीम का गठन किया गया था । जिसमें सोनहत के खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रेष्ठ मिश्रा एवं सहायक ग्रेड 03 संगीता सिंह को जॉच की जिम्मेदारी दी गई थी। किंतु 03 महीना होने के बावजूद अब तक इसकी जांच नहीं की जा सकी है। लगातार यह देखा जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग में जांच करने में जांच अधिकारी आनाकानी करते हैं जबकि सच्चाई सभी को पता है। वहीं पर जानकारो का मानना है कि आरोपी एवं जांच अधिकारी सभी का लोकल होने के कारण दूसरे से इनके लिंक कहीं ना कहीं जुड़े होते हैं जिस कारण जाच को लटकाया जाता है। वहीं पर जांच न होने से शिकायतकर्ता डॉ. प्रिंस जायसवाल ने कहा है कि जांच में जानबूझकर देरी की जा रही है एवं उन्हें विवश होकर न्यायालय की शरण में जाना पड़ेगा। गौरतलब हो कि बैकुंठपुर निवासी डॉ. प्रिंस जायसवाल ने शासन के अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से एक निजी हास्पिटल संचालक डाक्टर के एनेस्थीसिया में डिप्लोमा के दस्तावेज की जांच कराने की मांग की थी। उन्होने अपने लिखित पत्र में कहा है कि आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त डाक्टर के द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी अधिनियम, 2013 अंतर्गत पंजीयन के लिए संलग्न एनेस्थीसिया में डिप्लोमा का जो दस्तावेज अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा से सन् 1993 में पैरामेडिकल डिप्लोमा इन एनेस्थीसिया का प्रस्तुत किया गया है, जबकि डा. प्रिंस के द्वारा आरटीआई लगाकर विद्यालय से जानकारी ली गई। जिस पर विश्व विघालय ने जो जवाब दिया वह अपने आप में पूरे मामले से पर्दा हटाने के लिए काफी है। विश्वविद्यालय ने आरटीआई का लिखित जवाब में कहा है कि पैरामेडिकल डिप्लोमा इन एनेस्थीसिया चिकित्सक जैसा कोई कोर्स उनके यहा संचालित ही नही होता है। इसलिए डा. प्रिंस ने कहा कि कई दशको से संचालित निजी हास्पिटल के डाक्टर की योग्यता की उच्चस्तरीय जाच होनी चाहिए।
वर्जन1: मामले में जॉच चल रही है। जल्द ही जॉच पूरी कर ली जायेगी। जॉच का काम 90 फिसद पूरा कर लिया गया है।” – डॉ. प्रशांत सिंह – मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कोरिया
वर्जन2: तीन महिने बीत जाने के बावजूद जांच में जानबूझकर देरी की जा रही है । मजबूरन उन्हें न्यायालय की शरण में जाने को विवष होना पड़ेगा।” – डॉ. प्रिंस जायसवाल – शिकायतकर्ता, निवासी बैकुंठपुर
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