चिरमिरी। बंदरों का आतंक नगर पालिक निगम चिरमिरी शहर में दिन प्रतिदिन बढ़ते नज़र आ रहा है, इस गंभीर समस्या का निजात अब आम जनमानस के लिए मानों कभी पूरा ना होने वाले एक ख्वाब जैसा समझ में आ रहा है। आए दिन नगर पालिक निगम चिरमिरी शहर एवं मुख्य रूप से पोंड़ी एवं एस ई सी एल प्रबंधन के जी एम ऑफिस के साथ ही जी.एम. कॉम्प्लेक्स आवासीय परिसर में बंदरों के काटने की खबरें सुनने एवं देखने को मिलती रही हैं। जी एम ऑफिस का कार्यालय परिसर तो मानों जंगली बंदरों का मुख्य डेरा हो गया है जहां क्या दिन और क्या ही रात, हर पहर ही बंदरों को वहां डेरा जमाए देखा जाता है, खासतौर पर हर हफ्ते दिन गुरूवार को जी एम कॉम्प्लेक्स के महाप्रबंधक कार्यालय के ठीक सामने ही साप्ताहिक बाज़ार लगता है, जहां क्षेत्र के स्थानीय बाज़ार हाट करने यहां आते हैं, मगर जंगली बंदरों द्वारा कभी उनके सामानों को लूटने का प्रयास किया जाता है और इसी छीना झपटी में अक्सर स्थानीय लोगों को बंदरों द्वारा काट लिया जाता है तो कभी क्षति पहुंचाया जाता है, जिससे यहां के आम जनमानस में डर और भय का माहौल बनते जा रहा है, मगर आम लोगों की पीड़ा सुनने के लिए सक्षम इससे एक भी संबंधित विभाग नज़र नहीं आ रहा है, ऐसा लगता है कि मानो वानर राज के सामने शासन प्रशासन ने भी अपने घुटने टेक दिए हों।
आज दिनांक 05.06.2025 हर साल यह दिन विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाता है, जहां जगह जगह वृक्षारोपण कर वनों एवं पर्यावरण की महत्वत्ता एवं विशेषताओं की कहानी शासन प्रशासन द्वारा दर्शाई जाती है। मगर इसी बीच नगर पालिक निगम चिरमिरी शहर के वार्ड क्रमांक 02 में मौजूद एस ई सी एल प्रबंधन के महाप्रबंधक कार्यालय परिसर के भीतर एक गजब की घटना देखने को मिली, जहां एक स्थानीय ठेकेदार गोपाल महाराज उम्र 33 वर्ष जो कि चिरमिरी शहर के कोरिया के निवासी हैं, जो कि अपने किसी काम के सिलसिले से जी एम ऑफिस आए हुए थे, जिन्हें जंगली बंदरों द्वारा शारीरिक आघात पहुंचाया गया और जंगली बंदरों के हमले से उनके कंधे पर चोट आई, मौके पर जंगली बंदरों से जैसे तैसे अपनी जान बचा कर पीड़ित व्यक्ति गोपाल महाराज द्वारा पास ही के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हल्दीबाड़ी जो कि पोड़ी थाना के पास मौजूद है, वहां पहुंच कर प्राथमिक उपचार करवाया गया। जिसे ले कर नगर पालिक निगम चिरमिरी के एम आई सी सदस्य एवं बीजेपी से वार्ड क्रमांक 02 के वर्तमान पार्षद रामअवतार द्वारा लोगों की इस जटिल समस्या को ध्यान में रखते हुए बंदरों के निवारण के लिए एस ई सी एल प्रबंधन को बीते दिन बुधवार को पत्र लिखकर अवगत भी करवाया गया था और आज पीड़ित व्यक्ति की खबर मिलते ही पार्षद राम अवतार द्वारा अस्पताल पहुंच कर पीड़ित व्यक्ति से मुलाकात किया गया, पार्षद ने कहा उनके द्वारा इस समस्या को गंभीरता से लिया गया है और इस पर पार्षद जो भी हल हो सके उसे निकालने का प्रयास करते रहेंगे और प्रशासन के समक्ष इस बात को मजबूती से रखेंगे।
पत्रकारों ने जब पीड़ित व्यक्ति गोपाल महाराज से इस पूरे मामले की जानकारी ली तब उन्होंने बताया कि वह एक स्थानीय ठेकेदार हैं, कुछ माह पुर्व एस ई सी एल प्रबंधन द्वारा बंदरों के उपचार हेतु एस ई सी एल महाप्रबंधक कार्यालय से बंदरों के इस समस्या से निपटारे के लिए उन्हें ही टेंडर कार्य मिला था, मगर किसी कारणवश यह टेंडर निरस्त भी कर दिया गया। मतलब कहीं ना कहीं एस ई सी एल प्रबंधन भी अपने क्षेत्र से बंदरों की समस्याओं का निवारण करने में असमर्थ नज़र आ रही है। एक तरफ लोगों में आए दिन बंदरों के भयावाह रूप को देखते हुए डर का माहौल बढ़ते ही जा रहा है तो कहीं लोगों के बीच ऐसी मज़ाक़िया टिप्पणी भी सुनने को मिल रही हैं कि कटते जंगलों और बंद होती खदानों में फलदार वृक्षों की नियमानुसार रोपणी ना होने की वजह से बंदरों को खाने की तलाश में शहरों की ओर बढ़ना पड़ रहा है।
चिरमिरी शहर में नज़र आने वाले जंगली बंदर अब समय के साथ काफी ज़्यादा आक्रामक होते जा रहे हैं, यदि इसके पीछे के मुख्य कारणों को समझा जाए तो कहीं ना कहीं कटते जंगलों एवं बचे कुचे जंगलों में फलदार पेड़ों की कमी से बंदरों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता है, यह तो स्वाभाविक है कि पेट की भूख जब इंसानों को बर्दाश्त नहीं होते, फिर यह तो भला जंगली जानवर हैं, जो अपनी भूख मिटाने खाने की तलाश में इंसानी बस्ती की ओर या तो यूं कहें कि शहरों की तरफ बढ़ते चले आ रहे हैं, जिसका समाधान अब मानों भगवान भरोसे ही हो चला है, अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि क्या कभी इन बेजुबान कहे जाने वाले जंगली आक्रामक बंदरों से यहां की आम जनता को कभी छुटकारा मिलेगा या समय बीतने के साथ यहां इंसान कम और बंदरों की ही बड़ी जनसंख्या देखी जाएगी?






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