मनरेगा ने बदली बुलबुलराम की किस्मत: छोटे किसान से सफल ऑर्गेनिक उत्पादक बनने तक का सफर
रायपुर, 15 नवंबर 2025: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ने कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड के ग्राम पाढ़ी निवासी छोटे किसान श्री बुलबुलराम के जीवन में ऐतिहासिक बदलाव ला दिया है। 68,000 रुपए की लागत से स्वीकृत पशुशेड निर्माण न केवल उनके परिवार की आजीविका का आधार बना, बल्कि उन्हें एक सफल पशुपालक और जैविक सब्जी उत्पादक के रूप में स्थापित किया।
पक्के पशुशेड ने खोले उज्जवल भविष्य के द्वार
पहले खुले में पशुओं को रखने से सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती थीं। मनरेगा के तहत पशुशेड निर्माण होने से:
- पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार हुआ
- दूध उत्पादन बढ़कर 3–4 लीटर प्रतिदिन हुआ
- दूध 35–40 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से सीधे घर से ही बिकने लगा
- सुरक्षित आश्रय मिलने से अधिक पशु रखने की सुविधा मिली
- बछड़े और बछिया बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त हुई
इससे परिवार को प्रतिदिन 100 से 150 रुपये तक की नियमित आय होने लगी, जो उनके आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण साबित हुई।
जैविक खेती: पशुशेड ने दिया ऑर्गेनिक बाड़ी का आधार
शेड निर्माण के बाद गोबर और गौमूत्र का व्यवस्थित संग्रह संभव हुआ, जिसका उपयोग उन्होंने अपनी बाड़ी (किचन गार्डन) में जैविक खाद के रूप में किया। बिना किसी रासायनिक खाद के अब वे विभिन्न सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं।
- गाँव में इन सब्जियों की अच्छी मांग है
- घर पर ही शुद्ध एवं पौष्टिक सब्जियाँ उपलब्ध होती हैं
- बाजार से सब्जियाँ खरीदने का खर्च बच रहा है
इससे उनका परिवार आर्थिक तथा स्वास्थ्य दोनों स्तरों पर मजबूत हुआ है।
समाजिक दायित्व निभाते हुए बुलबुलराम बने प्रेरणास्त्रोत
आर्थिक स्थिरता के बाद उन्होंने एक गौवंशीय पशु का दान देकर समाज के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया। यह उनकी समृद्धि और उदारता को दर्शाता है।
चार स्थायी आय स्रोतों का निर्माण
मनरेगा के अंतर्गत बने एक पशुशेड ने बुलबुलराम को निम्नलिखित स्थायी आय स्रोत प्रदान किए:
- दूध विक्रय
- पशु विक्रय
- जैविक सब्जी उत्पादन
- गोवंशीय वृद्धि
आज उनका सात सदस्यीय परिवार आत्मनिर्भर ग्रामीण विकास का जीवंत उदाहरण बन चुका है।
मनरेगा: सिर्फ मजदूरी ही नहीं, बल्कि स्थायी आजीविका का आधार
यह सफलता कहानी स्पष्ट करती है कि मनरेगा केवल मजदूरी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में:
- स्थायी संपत्ति निर्माण
- अजीविका संवर्द्धन
- पशुधन संरक्षण
- पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली
का मजबूत माध्यम बन चुका है। बुलबुलराम की यह यात्रा यह सिद्ध करती है कि सही सहायता मिलने पर ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भरता की नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर सकते हैं।
The YUVA WORLD News के लिए — विशेष रिपोर्ट।






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