छत्तीसगढ़ में बार लाइसेंस का डेटा सार्वजनिक नहीं, RTI के भरोसे जानकारी—पारदर्शिता पर सवाल
बिलासपुर, 19 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ में शराब कारोबार से जुड़ा एक अहम मुद्दा अब पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। राज्य में संचालित लाइसेंसधारी बारों (FL-3/FL-4) की संख्या, नाम और लोकेशन जैसी महत्वपूर्ण जानकारी आज भी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है।
जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग द्वारा शराब दुकानों, नीतियों और राजस्व से जुड़ी सूचनाएं तो जारी की जाती हैं, लेकिन बार लाइसेंस से जुड़ा विस्तृत डेटा आम नागरिकों के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया है।
🔍 RTI ही एकमात्र रास्ता
यदि कोई नागरिक यह जानना चाहता है कि किसी जिले—जैसे बिलासपुर—में कितने बार वैध रूप से संचालित हैं, तो उसे सूचना का अधिकार (RTI) का सहारा लेना पड़ता है। सामान्य प्रक्रिया में यह जानकारी उपलब्ध नहीं है।
⚖️ कानून क्या कहता है?
Right to Information Act, 2005 की धारा 4 के अनुसार सरकारी विभागों को महत्वपूर्ण जानकारियों को स्वतः सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि नागरिकों को बार-बार RTI न लगानी पड़े। इसके बावजूद बार लाइसेंस से जुड़ा डेटा सार्वजनिक न होना कई सवाल खड़े करता है।
⚠️ निगरानी और जवाबदेही पर असर
- लाइसेंसी बारों की सूची सार्वजनिक न होने से वैध और अवैध संचालन में फर्क करना मुश्किल
- निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ती है
- प्रशासनिक जवाबदेही पर असर
🗣️ “राजस्व तो सार्वजनिक, लाइसेंस क्यों नहीं?”
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब सरकार शराब से करोड़ों का राजस्व कमा रही है, तो यह बताने में क्या दिक्कत है कि लाइसेंस किसे और कहाँ दिए गए हैं।
आपको बता दें…
छत्तीसगढ़ सरकार की किसी भी आधिकारिक वेबसाइट पर लाइसेंसधारी बारों की सूची या संख्या सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। जबकि अन्य लाइसेंस जैसे शराब दुकान और यूनिट की जानकारी आंशिक रूप से उपलब्ध है, लेकिन बार लाइसेंस से जुड़ा डेटा पूरी तरह सार्वजनिक डोमेन से गायब है।
❗ बड़ा सवाल
क्या छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग अब राज्य में संचालित सभी लाइसेंसी बारों का डेटा सार्वजनिक करेगा, या आम नागरिकों को आगे भी RTI के सहारे ही जानकारी लेनी पड़ेगी?







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