बिलासपुर: जिले के सकरी थाना क्षेत्र में 34 वर्षीय युवक अजय देवांगन के अपहरण और मारपीट के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह मामला जहां परिजनों की सतर्कता से सुलझा, वहीं सकरी पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
FIR में दर्ज बयान के अनुसार, 19 मार्च 2026 की रात करीब 8:45 बजे अजय देवांगन अपने होटल को बंद कर बस से तखतपुर जा रहे थे। इसी दौरान दो युवक बस में चढ़े और उन पर एक महिला से छेड़छाड़ का आरोप लगाकर उन्हें अपने साथ चलने के लिए कहा। सकरी ओवरब्रिज के पास उन्हें बस से उतारा गया और बाइक में बैठाकर ले जाया गया।
रास्ते में आरोपियों ने उनका मोबाइल बंद कर दिया और चाकू दिखाकर धमकाया। इसके बाद उन्हें एक तालाब के पास ले जाकर आरोपी अमित बृजवाल और उसके साथियों ने गाली-गलौज करते हुए बेरहमी से मारपीट की।
FIR के अनुसार, आरोपियों ने अजय को अपने घर खम्हरिया ले जाकर बेल्ट से पीटा, जान से मारने की धमकी दी और लगातार प्रताड़ित किया। इस दौरान घर में मौजूद महिला सहित अन्य लोगों द्वारा भी मारपीट की गई। पीड़ित के शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं।
घटना की सुचना लगते ही परिजन पहुंचे थाना
आपको बता दें कि जैसे ही अजय देवांगन के परिजन और मित्रों को इस घटनाक्रम की जानकारी हुई सभी पुलिस से मदद की गुहार लगाने सकरी थाना पहुंचे जहां पुलिस वालों को घटना की पूरी जानकारी दी गई लेकिन सकरी पुलिस ने इतने गंभीर मामले में परिजन और मित्रों को समझाइए देकर चलाता कर दिया।
परिजनों ने बताया कि थाना वालों ने सुबह बड़ा सा फोटो लेकर आने को कहा है। उसके बाद परिजन और मित्रों की आस पुलिस से उठ गई और खुद ही तलाश जारी रखा।
परिजनों ने बचाई जान, पुलिस रही पीछे
अपहरण हुए अजय देवगन के परिजनों के बताएं अनुसार : घटना के बाद परिजनों ने खुद खोजबीन शुरू की। पूछताछ के दौरान उन्हें पता चला कि अजय को एक घर में बंधक बनाकर रखा गया है। परिजन मौके पर पहुंचे और डायल 112 को सूचना दी।
112 की टीम मौके पर पहुंची और परिजनों के साथ आरोपी के घर में दबिश देकर पीड़ित और आरोपियों को सकरी थाना लाया गया।
रात में महिला पुलिस बल नहीं—महिला आरोपी को छोड़ने का आरोप…
सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब थाने में महिला पुलिस बल नहीं होने के कारण एक महिला आरोपी को रात में ही जाने दिया गया और FIR में उसका नाम भी नहीं है। वहीं पुलिस ने महिला के पति सहित 3 युवकों को थाने में बैठाकर रखी जिसमें से एक युवक को महीला को घर ले जाने के लिए छोड़ दिया वहीं दो लोगों की खूब पुलिसया खातिरदारी भी की गई।
प्रत्यक्ष रूप से सामने आया कि पीड़ित युवक बार-बार चिल्लाकर कहता रहा कि “इस महिला ने भी मारपीट की है”, बावजूद इसके पुलिस ने उसे यह कहकर छोड़ दिया कि सुबह थाना प्रभारी के सामने आकर अपना पक्ष रखें। ( Video हमारे पास मौजूद हैं )
यह स्थिति न सिर्फ पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि महिला पुलिस बल की कमी कितनी गंभीर समस्या बन सकती है।
गंभीर सवालों के घेरे में सकरी थाना
– जब परिजनों ने पहले ही सूचना दी थी, तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
– क्या गंभीर अपहरण जैसे मामले में सिर्फ “फोटो लेकर आना” कहना पर्याप्त था?
– महिला आरोपी को बिना कार्रवाई छोड़ा जाना क्या नियमों के अनुरूप है?
– बिना महिला पुलिस के आरोपियों को थाने लाना और फिर छोड़ देना—क्या यह प्रक्रिया सही है?
इन कानूनी धाराओं में दर्ज हुआ मामला
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 296, 351(3), 115(2) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
यह पूरा मामला साफ दर्शाता है कि जहां एक ओर परिजनों की सतर्कता और सक्रियता से एक युवक की जान बच गई, वहीं पुलिस की प्रारंभिक निष्क्रियता और रात में महिला पुलिस बल की कमी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अगर परिजन समय रहते सक्रिय नहीं होते, तो यह मामला और भी भयावह रूप ले सकता था।
नोट : मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण Video भी हमारे पास मौजूद हैं जिसका प्रसारण हम अपने अगले अंक में करेंगे !












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