आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली:
1. शांति मंडावी – (₹08 लाख इनामी) पूर्वी बस्तर डिवीजन के कंपनी नंबर 06 की सदस्य।
2. सुखराम उर्फ बादल – (₹03 लाख इनामी) उत्तर सब-जोनल सदस्य।
3. प्रकाश उर्फ चिन्ना – (₹02 लाख इनामी) बैयमपल्ली आरपीसी सीएनएम अध्यक्ष।
4. मुकेश उर्फ कमलू सुंडाम – बैयमपल्ली आरपीसी जनताना सरकार उपाध्यक्ष।
5. मुचाकी सन्नी – बुरगुम आरपीसी केएएमएस सदस्य।
6. जोगा मुड़ाम – परलागट्टा संघम सदस्य।
पुलिस और सुरक्षाबलों की अपील लाई रंग
दंतेवाड़ा पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) द्वारा भटके हुए युवाओं को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए लगातार व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली पुलिस और प्रशासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर वापस लौटे हैं। इस नीति के तहत माओवादियों को हिंसा छोड़कर शांति और विकास के मार्ग पर लौटने का अवसर दिया जा रहा है।
लोन वर्राटू अभियान के तहत अब तक आत्मसमर्पण के आंकड़े:
- 221 इनामी नक्सली समेत कुल 912 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
- पुलिस द्वारा आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को समाज में पुनर्वास के लिए मदद दी जा रही है।
- पुनर्वास नीति: आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिलेगा सरकारी सहयोग
सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को निम्नलिखित सुविधाएं दी जाएंगी:
✅ ₹25,000 की आर्थिक सहायता।
✅ स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग, जिससे वे रोजगार के नए अवसरों से जुड़ सकें।
✅ आवासीय सुविधा और कृषि भूमि, ताकि वे अपने परिवार के साथ सम्मानजनक जीवन जी सकें।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
दंतेवाड़ा पुलिस अधीक्षक (SP) ने कहा कि लोन वर्राटू अभियान से नक्सलियों में विश्वास जगा है कि वे भी मुख्यधारा में लौटकर एक सामान्य जीवन जी सकते हैं। प्रशासन का प्रयास है कि अधिक से अधिक माओवादी हथियार छोड़कर समाज में शामिल हों।
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