अमेरिका में भारतीय छात्रों की बढ़ती चिंता: ट्रंप ने कॉलेज प्रदर्शनकारियों की राष्ट्रीयता की जानकारी मांगी
देश दुनिया – अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कॉलेजों से उन प्रदर्शनकारी छात्रों के नाम और उनकी राष्ट्रीयता की जानकारी मांगी है, जो यहूदी-विरोधी (Anti-Semitic) प्रदर्शनों में शामिल रहे हैं। इस फैसले के बाद विदेशी छात्रों, खासकर भारतीय छात्रों में डिपोर्ट (निर्वासन) होने का डर बढ़ गया है।
क्या है पूरा मामला?
हाल के महीनों में अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। कुछ कैंपसों में यहूदी छात्रों और शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं भी सामने आईं। इसी को ध्यान में रखते हुए, राष्ट्रपति ट्रंप ने शिक्षा विभाग को आदेश दिया कि वे प्रदर्शनकारियों की पहचान करें और उनकी नागरिकता की जानकारी इकट्ठा करें।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य कैंपस में बढ़ती असहिष्णुता और यहूदी विरोधी गतिविधियों को रोकना है। हालांकि, इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय छात्रों में वीजा रद्द होने और अमेरिका से बाहर निकाले जाने का डर गहरा गया है।
भारतीय छात्रों पर असर
अमेरिका में पढ़ने वाले भारतीय छात्र अंतरराष्ट्रीय छात्रों में दूसरा सबसे बड़ा समूह हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2024 में लगभग 3.5 लाख भारतीय छात्र अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। यदि किसी भारतीय छात्र का नाम इस सूची में आता है, तो उसे वीजा कैंसिल होने या डिपोर्टेशन (निर्वासन) का सामना करना पड़ सकता है।
कुछ विश्वविद्यालय प्रशासन इस मांग का विरोध कर रहे हैं, लेकिन यदि आदेश लागू होता है, तो कई भारतीय छात्र प्रभावित हो सकते हैं। भारतीय छात्र संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने छात्रों से सतर्क रहने और बिना जांचे-परखे किसी भी विरोध प्रदर्शन में भाग न लेने की सलाह दी है।
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
- कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम अमेरिका के फ्री स्पीच (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) के अधिकार का उल्लंघन कर सकता है।
- कई विश्वविद्यालयों ने इस आदेश पर आपत्ति जताई है और कहा है कि वे छात्रों की नागरिकता की जानकारी प्रशासन के साथ साझा नहीं करेंगे।
- कुछ संगठनों ने इसे विदेशी छात्रों के खिलाफ पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करार दिया है।
- भारतीय दूतावास भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और छात्रों को कानूनी मदद देने के लिए तैयार है।
ट्रंप के इस फैसले पर विवाद क्यों?
- विरोधियों का कहना है कि यह आदेश विशेष रूप से विदेशी छात्रों को निशाना बना सकता है।
- यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ माना जा रहा है।
- कई छात्र संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने ट्रंप के इस कदम की आलोचना की है।
क्या करें भारतीय छात्र?
- किसी भी प्रदर्शन में भाग लेने से पहले संभावित कानूनी परिणामों पर विचार करें।
- यूनिवर्सिटी प्रशासन और भारतीय दूतावास से संपर्क बनाए रखें।
- यदि किसी कानूनी समस्या का सामना करना पड़े, तो तुरंत विशेषज्ञों से सलाह लें।
- अपने वीजा और आव्रजन दस्तावेजों को अपडेट रखें और नियमों का पालन करें।
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