एनएसयूआई ने दीक्षांत समारोह में लाखों की फिजूलखर्ची पर रोक की मांग, रंजेश सिंह ने कुलसचिव को सौंपा ज्ञापन
बिलासपुर। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के प्रदेश सचिव रंजेश सिंह ने अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कुलसचिव को ज्ञापन सौंपते हुए दीक्षांत समारोह के नाम पर हो रहे लाखों रुपये के दुरुपयोग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
एनएसयूआई का आरोप है कि विश्वविद्यालय हर वर्ष करीब 60 लाख रुपये से अधिक खर्च कर दीक्षांत समारोह आयोजित करता है, जबकि अन्य सरकारी विश्वविद्यालय—जैसे पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर और हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग—कम बजट में समारोह आयोजित करते हैं।
कैंपस में बुनियादी सुविधाओं का अभाव
ज्ञापन में कहा गया है कि विश्वविद्यालय कैंपस में अभी तक हॉस्टल जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। बुनियादी ढांचे की कमी के कारण विश्वविद्यालय NAAC मान्यता भी हासिल नहीं कर पाया है।
एनएसयूआई का आरोप है कि बजट की कमी के चलते विश्वविद्यालय ने पुलिस विभाग के लिए कैंपस की जमीन तक बेच दी, लेकिन प्रबंधन इस पर रोक लगाने में विफल रहा।
भंडार क्रय नियम के पालन की मांग
रंजेश सिंह ने मांग की कि दीक्षांत समारोह सहित सभी खरीद-फरोख्त और विश्वविद्यालय खर्चों में भंडार क्रय नियम का पारदर्शी तरीके से पालन किया जाए ताकि किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार या लाभ का दुरुपयोग न हो।
“छात्रहित सर्वोपरि, नहीं तो होगा आंदोलन” — एनएसयूआई
एनएसयूआई ने कहा कि विश्वविद्यालय का बजट छात्रों की सुविधाओं पर खर्च होना चाहिए। मोटी रकम समारोहों में खर्च करने से सीधा असर छात्रों की जेब पर पड़ता है और वे आवश्यक सुविधाओं से वंचित हो जाते हैं।
रंजेश सिंह ने चेतावनी दी कि अगर विश्वविद्यालय प्रशासन ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो एनएसयूआई बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।








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