राम कथा के तीसरे दिन संत विजय कौशल जी महाराज ने बताया माता-पिता और गुरु का महत्व
बिलासपुर | 14 जनवरी 2026 – राम कथा के तीसरे दिन संत श्री विजय कौशल जी महाराज ने माता, पिता और गुरु के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जिन पुत्रों को इन तीनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, उन्हें किसी भी तीर्थ यात्रा पर जाने की आवश्यकता नहीं होती।
उन्होंने कहा कि जो संतान अपने आचरण और व्यवहार से माता-पिता एवं गुरु को प्रसन्न कर लेती है, उसे किसी अन्य स्थान पर आशीर्वाद खोजने की जरूरत नहीं पड़ती।
लाल बहादुर शास्त्री मैदान श्रद्धालुओं से खचाखच भरा
संत श्री विजय कौशल जी महाराज की कथा में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। सुमधुर संगीतमय रामकथा में रामचरितमानस की चौपाइयों को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए।
मां की सेवा सर्वोपरि : संत विजय कौशल
संत श्री ने कहा कि सबसे पहली प्राथमिकता मां के चरणों में आशीर्वाद लेने की होनी चाहिए। मां की सेवा, उनके कपड़े साफ करना, पैर दबाना—ये सभी कर्तव्य हैं। उन्होंने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं कई वर्षों तक अपनी मां की सेवा की है।
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान ने स्वयं कहा है कि वे माखन इसलिए चुराते हैं क्योंकि उसमें मां का प्रेम होता है। मां की प्रसव पीड़ा को उन्होंने हजारों बिच्छुओं के डंक से भी अधिक पीड़ादायक बताया।
सिर ढंकने की परंपरा और संस्कारों की सीख
कथा के दौरान संत श्री ने सिर ढंककर रखने की परंपरा का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि ठंड, गर्मी और वर्षा—तीनों मौसम में सिर ढंककर रखना चाहिए, अन्यथा रोग लगने की संभावना रहती है। उन्होंने बताया कि यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं द्वारा सिर ढंकने की परंपरा रही है।
उन्होंने कहा कि बच्चे सीखते हैं, इसलिए बच्चों को सिर पर बैठाकर रखें ताकि वे अच्छे संस्कार ग्रहण करें। 7 वर्ष तक बच्चे भोले होते हैं, 14 वर्ष के बाद उन्हें गुरु की विशेष आवश्यकता होती है।
विश्वामित्र, जनक और धनुष यज्ञ की कथा
संत श्री ने कथा में आगे बताया कि विश्वामित्र मुनि के यज्ञ की रक्षा के लिए भगवान राम और लक्ष्मण आश्रम पहुंचे। गौतम ऋषि की शापित पत्नी अहिल्या का उद्धार भगवान राम ने अपने चरण-स्पर्श से किया। इसके पश्चात गंगा माता की महिमा सुनकर भगवान राम भाव-विभोर हो गए।
जनकपुर पहुंचने पर राजा जनक ने दोनों राजकुमारों का स्वागत किया। नगर भ्रमण के दौरान राम-लक्ष्मण की सुंदरता की चर्चा पूरे नगर में फैल गई। स्वयंवर में जब कोई भी राजा शिवधनुष पर प्रत्यंचा नहीं चढ़ा सका, तब भगवान राम ने गुरुजनों और माता-पिता को प्रणाम कर धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट गया।
इसके पश्चात माता जानकी ने भगवान राम के गले में वरमाला डाल दी और पूरे सभागार में जय-जयकार गूंज उठी।
समाजों एवं संस्थाओं ने किया भव्य स्वागत
कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य संरक्षक श्री अमर अग्रवाल, श्रीमती शशि अग्रवाल सहित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रो. ए.डी.एन. वाजपेयी सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा संत श्री का भव्य स्वागत किया गया।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य संरक्षक श्री अमर अग्रवाल एवं श्रीमती शशि अग्रवाल द्वारा आरती संपन्न कराई गई।
📌 The YUVA WORLD News









Average Rating
More Stories
CG News: केशकाल में लगी देवी-देवताओं की अदालत, भंगाराम माई के दरबार में 35 को सजा!
छत्तीसगढ़ में गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत! PM Awas Yojana Urban की कट-ऑफ डेट बदली
बिलासपुर (Bilaspur): शराब पीने के लिए पैसे मांगे, नहीं देने पर मारपीट और चाकूनुमा हथियार से हमला; आरोपी गिरफ्तार