Chhattisgarh में आम जनता का क्या होगा? सिटी कोतवाली के सामने धरने पर बैठे तहसीलदार
सारंगढ़। छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है।
सारंगढ़ सिटी कोतवाली के ठीक सामने कोरबा में पदस्थ तहसीलदार बंदे राम भगत धरने पर बैठ गए हैं।
तहसीलदार का आरोप है कि उनके पुत्र राहुल भगत के साथ कलेक्टर के गार्ड द्वारा गालीगलौज और मारपीट की गई, लेकिन 48 घंटे बीतने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
तहसीलदार बंदे राम भगत ने बताया कि यह घटना 20 जनवरी की है, जब उनके बेटे के साथ मारपीट की गई।
इस मारपीट में राहुल भगत के कान का पर्दा फट गया, इसके बावजूद पुलिस सिर्फ आवेदन लेकर मामले को टालती रही।
📌 48 घंटे बाद भी FIR नहीं
मिली जानकारी अनुसार पीड़ित पक्ष द्वारा सारंगढ़ सिटी कोतवाली में लिखित आवेदन दिए जाने के बावजूद पुलिस की ओर से न तो FIR दर्ज की गई और न ही किसी तरह की ठोस कार्रवाई सामने आई है।
इसी से आक्रोशित होकर तहसीलदार बंदे राम भगत को धरने पर बैठना पड़ा।
धरने की खबर मिलते ही थाना परिसर में हड़कंप मच गया है और आला अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दे दी गई है।
फिलहाल तहसीलदार धरने पर डटे हुए हैं और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
❓ बड़ा सवाल: आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा?
यह मामला सिर्फ एक तहसीलदार या उनके बेटे तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
जब एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी को अपने बेटे के लिए न्याय पाने हेतु धरने पर बैठना पड़ रहा है, तो आम नागरिकों को न्याय के लिए कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता होगा?
यह घटना छत्तीसगढ़ में पुलिस की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब और क्या ठोस कदम उठाता है।
— The YUVA WORLD News








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