CG News : बिलासपुर में धान घोटाले की आहट?
एक मिल, दो यूनिट और करोड़ों का खेल The Yuva World News के खबर का असर बनी जांच टीम…!
⭕ राइस मिल पर फर्जी पंजीयन और विभागीय मिलीभगत के आरोप..
⭕ नियमों को ताक पर रख किसने दिया राइस मिलर को “अभयदान”?
बिलासपुर : जिले में धान खरीदी लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, लेकिन इसी बीच
बिल्हा क्षेत्र की मां नारायणी राइस मिल से जुड़ा मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया है।
The Yuva World News में प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन ने स्वयं स्वीकार किया है कि मामला गंभीर है,
और इसी आधार पर जांच टीम गठित करने का आदेश जारी किया गया है।
यह वही आरोप हैं जो खबर में उठाए गए थे—
और अब यही बिंदु प्रशासनिक जांच का आधार बने हैं।
📌 आदेश में वही आरोप, जो खबर में उठे
कलेक्टर कार्यालय (खाद्य शाखा) द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि
विपणन वर्ष 2025–26 में मां नारायणी राइस मिल, ग्राम केसला, विकासखंड बिल्हा के विरुद्ध
प्रकाशित खबर “बिलासपुर में धान घोटाले की आहट? एक मिल, दो यूनिट और करोड़ों का खेल”
की जांच के लिए जांच दल का गठन किया जाता है।
यह स्पष्ट करता है कि प्रशासनिक कार्रवाई सीधे मीडिया रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुई है।
📌 क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, मां नारायणी राइस मिल के संचालक अमित मित्तल ने
वर्ष 2024–25 में धान उठाव किया था।
नियमों के अनुसार उन्हें कुल उठाए गए धान का कम से कम 50 प्रतिशत चावल शासन को जमा करना था, लेकिन—
- कुल 97 लॉट चावल जमा होना था
- अब तक केवल 41 लॉट ही जमा किया गया
- इसके बावजूद वर्ष 2025–26 में कस्टम मिलिंग की अनुमति मिल गई
📌 पुराना पंजीयन फेल, नया खेल शुरू
मिली जानकारी अनुसार जब यह स्पष्ट हो गया कि पुराने पंजीयन के आधार पर नया सीजन नहीं मिलेगा,
तो आरोप है कि—
- उसी परिसर में स्थित कोढ़हा मिल को राइस मिल दर्शाकर नया पंजीयन लिया गया
- नया पंजीयन प्राप्त किया गया
- बिना पर्याप्त स्टेबलिशमेंट के धान उठाव शुरू कर दिया गया
📌 पुराने चावल की भरपाई नए धान से?
सूत्रों के अनुसार,
वर्ष 2025–26 में उठाए गए धान से वर्ष 2024–25 के बकाया चावल की भरपाई की जा रही है,
ताकि पुराने पंजीयन को वैध दर्शाया जा सके।
📌 भौतिक सत्यापन और जांच — एक ही अधिकारी?
आपको बता दें कि मिली जानकारी के अनुसार सब से गंभीर सवाल यह है कि
नवंबर माह में नए पंजीयन का भौतिक सत्यापन करने वाली सहायक खाद्य अधिकारी विनीता दास
अब उसी मामले की जांच टीम में भी शामिल हैं।
क्या यह अपने ही सत्यापन की जांच नहीं है?
यही कारण है कि जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
📌 गठित जांच टीम
- राजेंद्र भगत – तहसीलदार
- विनीता दास – सहायक खाद्य अधिकारी
- ललिता शर्मा – खाद्य निरीक्षक
जांच टीम को 7 दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
📌 सूत्रों से बड़ा खुलासा
- मिल परिसर में विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार धान मौजूद नहीं
- वर्ष 2024–25 का धान मौके पर अनुपस्थित
- धान को बिचौलियों के माध्यम से दोबारा समितियों में खपाने के आरोप
सूत्रों का दावा है कि इससे धान–चावल की योजनाबद्ध रिसाइक्लिंग कर शासन को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया गया।
📌 जांच में देरी पर भी उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में एक अहम सवाल यह भी है कि
जब अंततः जांच टीम गठित करनी ही थी,
तो फिर खबर प्रकाशित होने के पूरे 6 दिन बाद जांच के आदेश क्यों दिए गए?
क्या यह देरी केवल प्रशासनिक औपचारिकता थी,
या फिर राइस मिलर को अपने फैले हुए “रायते” को समेटने का समय दिया गया?
जानकारों के अनुसार, यदि जांच समय रहते होती,
तो धान, चावल, स्टॉक रजिस्टर और भौतिक स्थिति उसी अवस्था में सामने आ सकती थी।
अब जबकि मामला सार्वजनिक हो चुका है,
सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं—
क्या सच सामने आएगा या मामला कागजों में सिमट जाएगा।
नोट: खबर तथ्यों, दस्तावेज़ों और विश्वसनीय सूत्रों पर आधारित है।
संबंधित पक्ष का पक्ष रखने के लिए अवसर सुरक्षित है।
Source : The Yuva World News







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