लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन : 120 दिन से जारी संघर्ष, अपने आशियाने को बचाने की लड़ाई
बिलासपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर क्षेत्र के लिंगियाडीह में पिछले 120 दिनों से लगातार अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन जारी है। यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने घर-आंगन और जीवन भर की कमाई से बनाए गए आशियाने को बचाने की लड़ाई बन चुका है।
लिंगियाडीह के सैकड़ों परिवार पिछले तीन महीनों से सड़क पर बैठकर अपनी आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। इन परिवारों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत, खून-पसीने की कमाई और उम्मीदों के सहारे अपने घर बनाए हैं।
इन घरों में केवल ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि यादें, भावनाएं और भविष्य की उम्मीदें भी बसी हुई हैं।
महिलाएं, बुजुर्ग और युवा—सब एकजुट
धरना स्थल पर हर दिन महिलाएं, बुजुर्ग और युवा एक साथ बैठकर अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे किसी टकराव या विवाद की राह नहीं चाहते, बल्कि सरकार से संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण की अपेक्षा रखते हैं।
स्थानीय मुद्दे से बड़ा जन-आंदोलन बना
करीब 4 माह से जारी यह आंदोलन अब केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह आवास, अधिकार और सम्मान से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है। यह संघर्ष दिखाता है कि जब लोगों के घर और अस्तित्व पर संकट आता है, तो वे शांतिपूर्ण तरीके से भी अपने हक की लड़ाई लड़ते हैं।
सरकार से संवाद की मांग
ऐसे में जरूरत है कि छत्तीसगढ़ सरकार और प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए आंदोलनकारियों से संवाद स्थापित करे और ऐसा समाधान निकाले जिससे लोगों का आशियाना सुरक्षित रहे और आंदोलन को सम्मानजनक विराम मिल सके।
लिंगियाडीह के लोगों की मांग सिर्फ इतनी है कि उनके सपनों का घर न टूटे और उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे। यदि सरकार संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेती है, तो न केवल सैकड़ों परिवारों को राहत मिलेगी, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास भी मजबूत होगा।







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