बिलासपुर : जिले के सकरी में संकरी सड़क से परेशान आम नागरिकों को राहत देने के नाम पर नवंबर 2024 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उस्लापुर रेलवे ओवरब्रिज से सकरी बाईपास चौक तक लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क का लोकार्पण किया था। बड़े-बड़े दावे किए गए कि अब ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी, सफर आसान होगा और बिलासपुर का प्रवेश द्वार नई पहचान बनेगा।
लेकिन आज हकीकत उन दावों का मजाक उड़ाती नजर आ रही है।
करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सड़क जगह-जगह से उखड़ चुकी है। बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिनमें पानी भरा रहता है। सड़क की हालत देखकर ऐसा लगता है कि निर्माण के समय गुणवत्ता को ताक पर रख दिया गया था। सवाल यह है कि आखिर इतनी जल्दी करोड़ों की सड़क कैसे जवाब दे गई?
सबसे बड़ा सवाल जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से है। इसी मार्ग से केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव, तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी गुजरते हैं। क्या उन्हें सड़क की यह बदहाली दिखाई नहीं देती? या फिर देखकर भी अनदेखा किया जा रहा है?
अब आम लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी हैं। लोगों का आरोप है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि नेता और अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का खेल हुआ और इसी कारण आज तक किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई नहीं हुई। यदि ऐसा नहीं है, तो फिर खराब निर्माण के लिए दोषियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत के नाम पर सिर्फ लीपापोती की जा रही है। गड्ढों में थोड़ा-बहुत मटेरियल डाल दिया जाता है, लेकिन दूसरे ही दिन वह गायब हो जाता है। लोगों का तंज है कि “गड्ढों में डाला गया मटेरियल भी दूसरे दिन ऐसे गायब हो जाता है, जैसे गंजे के सिर से बाल।”
यह सड़क बिलासपुर को मुंगेली, कवर्धा, लोरमी और आसपास के क्षेत्रों से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। हर दिन हजारों लोग इसी रास्ते से सफर करते हैं, लेकिन उनकी परेशानी सुनने वाला कोई दिखाई नहीं देता।
लोगों का कहना है कि जिन्हें जनता ने अपने अधिकारों की रक्षा और विकास के लिए चुना था, वे आज जनता की समस्याओं से मुंह मोड़े बैठे हैं। आखिर जनता कब तक टूटी सड़कों, गड्ढों और खोखले वादों का बोझ उठाती रहेगी?
अब जनता पूछ रही है—16 करोड़ रुपये की सड़क आखिर डेढ़-दो साल में ही क्यों उखड़ गई? जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी, या फिर हर बार की तरह इस बार भी मामला सिर्फ कागजों और खानापूर्ति तक ही सीमित रह जाएगा?









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