चिरमिरी वन परिक्षेत्र में उलट चल रहा खेल, मुख्यमंत्री साय दे रहे हैं अवैद्य अतिक्रमण पर सख़्त कार्यवाही करने के निर्देश, प्रभारी रेंजर बोले अतिक्रमणकारियों को समझाइश दिए हैं, कब्जा भूमि में नहीं बनेगा मकान, कब्जाधारी बोले मकान यहीं बनाएंगे, अंततः निर्माण कार्य हुआ संपन्न

चिरमिरी। छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अवैद्य सुशासन तिहार के तीसरे चरण में दिनांक 22.05.2025 दिन गुरूवार को अवैद्य अतिक्रमण पर सीधा निशाना साधा है, अम्बिकापुर के जिला पंचायत सभाकक्ष में उनके द्वारा अतिक्रमणकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई के निर्देश मानों पूरे प्रदेश में गूंज उठे हैं। मुख्यमंत्री साय ने बैठक में यह स्पष्ट कर दिया कि वनाधिकार पट्टे की समीक्षा राजस्व विभाग, आदिवासी विकास विभाग एवं वन विभाग संयुक्त रूप से करते हुए केवल पात्र हितग्राहियों को ही पट्टे का वितरण करे, इसके साथ ही मुख्यमंत्री साय ने बैठक में मौजूद समस्त पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि अवैद्य पट्टा धारकों एवं अतिक्रमणकारियों पर प्रशासन सख्त कार्रवाई करने में कोई चूक ना करे। मुख्यमंत्री साय द्वारा अवैद्य कब्जों को ले कर यह कदम बेहद सराहनीय तो है, मगर इसका असर जिला एमसीबी के अन्तर्गत चिरमिरी शहर पर कुछ खास दिखाई नहीं पड़ता है।
हम बात कर रहे हैं जिला एमसीबी के नगर पालिक निगम चिरमिरी शहर के जंगलों से सटे हुए केराडोल इलाके की, जो कि वर्तमान में वन परिक्षेत्र चिरमिरी के दायरे में आता है, हालांकि वन परिक्षेत्र चिरमिरी को नवीन जिला एमसीबी के वन मंडल मनेंद्रगढ़ में सम्मिलित करने का प्रस्ताव पारित भी हो चुका है और शामिल कर लिया गया है मगर अभी कागज़ी तौर पर वन परिक्षेत्र चिरमिरी वन मंडल बैकुंठपुर कोरिया के अधीन ही है। चिरमिरी का यह केराडोल इलाका वन परिक्षेत्र चिरमिरी के अंतर्गत आता है, जैसा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अवैद्य कब्जे को ले कर सख्त कार्यवाही की बात कही, जिस पर प्रदेश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र में समाचार संकलन कर्ता द्वारा इस पर खबर का प्रकाशन भी किया गया है।

मगर ठीक इसके विपरित केराडोल के बीट पुर्वी साजा पहाड़ कंपार्टमेंट क्रमांक 534 में एक ऐसा भी नज़ारा देखने को मिला जहां प्रशासन के तमाम नियमों की धज्जियां उड़ाते वहां के अवैद्य कब्जाधारियों ने प्रशासन को मानो कोई धुंआधार चुनौती दे दी हो।अभी हाल ही में हुई एक ऐसी घटना जिसे देख कर ऐसा लगा कि आज वन विभाग किस कदर मायुस, लाचार और बेबस हो चला है कि वन विभाग अपने ही भुमि से अवैद्य अतिक्रमण को हटाने में नाकाबिल साबित हो गया। यह मामला दिनांक 19.05.2025 के दिन सोमवार से शुरू हुआ जब वन अमला पुलिस प्रशासन के साथ संयुक्त कार्यवाही को अंजाम देने नगर पालिक निगम चिरमिरी के केराडोल क्षेत्र में पहुंचा था, मिली जानकारी के अनुसार पूरे प्रशासनिक अमले को वहां अवैद्य कब्जा हटा कर कार्यवाही को सफल बनाना था, मगर वहां खेल तब पलटा जब वन अमला को वहां के अवैद्य कब्जाधारियों ने धुंआधार गालियां देते हुए वन विभाग के कर्मचारी को जान से मारने तक की धमकी दे डाली, और मौके पर मौजूद वन विभाग के अधिकारी कार्यवाही के नाम पर डरे सहमे वहां के कब्जाधारियों पर कार्यवाही करने के बजाय उनका सहयोग करने और समझाइश देने जैसी बातें पत्रकारों को कहते नज़र आए, जिस पर सवाल यह खड़े होता है कि क्या अतिक्रमणकारियों के सामने शासन प्रशासन ने अपने घुटने टेक दिए? क्योंकि वर्तमान तस्वीरें कुछ और ही बयान कर रही हैं, बीते सोमवार को वहां दिखाई दे रही ईंट की दीवार जो कि आज दिनांक 24.05.2025 दिन शनिवार को मात्र चंद दिनों में अब एक मकान के रूप में नज़र आने लगा है, जिस बात को वहां कब्जाधारियों ने वन अमला को बतौर चुनौती देते हुए कह भी दिया था कि मकान तो अब उसी कब्जा की गई भुमि पर ही बनेगा।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, कहा हम गरीबों को सता रहा वन विभाग, बड़े तबके के कब्जाधारियों पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं?
कब्जाधारियों ने वन विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि वन परिक्षेत्र चिरमिरी द्वारा उनके अतिक्रमण पर कार्यवाही करने आए वन विभाग के अधिकारी उसी इलाके में बाकि कब्जाधारियों पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं कर रहे, जबकि रेंजर को लोगों ने अन्य स्थानीय लोगों द्वारा सगौन के अवैद्य कटाई कर वहां मकान बनाने की बात कही और साथ चल कर मौके का जायज़ा लेने भी कहा मगर लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि ऊंचे तबके लोगों से मोटी रकम लेकर उन्हें मकान बनाने दिया गया, तो हमारे ऊपर कार्यवाही की बात क्यों आ रही, एक का घर टूटेगा तो बाकियों का क्यों नहीं, सब पर कार्यवाही होनी चाहिए, जिस पर वन परिक्षेत्र चिरमिरी के प्रभारी रेंजर मौन क्यों रहे?
अब सबसे महत्वपूर्ण बात इस पूरे मामले में यह है कि पत्रकारों से बातचीत के दौरान डरे सहमे घबराए वन परिक्षेत्र चिरमिरी के प्रभारी रेंजर सुर्यदेव सिंह ने उलूल जुलूल बयानबाजी कर डाली, उन्होंने अपने लाचारी, बेबसी, और गैरज़िम्मेदारी का ठीकरा पीडब्ल्यूडी विभाग पर फोड़ने की कोशिश की और कह दिया सड़क से दस मीटर तक के दायरे में अतिक्रमण होने पर पीडब्ल्यूडी विभाग को भी इस कार्यवाही में उनके साथ खड़े होना था, मगर उन्होंने असल नियम कायदों पर ध्यान ही नहीं दिया, कहीं ना कहीं ज्ञान के अभाव में रेंजर साहब ने मीडियाकर्मियों के ही सामने बाईट देते हुए पट्टे बंटवाने की बात भी उन अतिक्रमणकारियों के सामने कह दी मगर उस विवादित माहौल से भागने की हड़बड़ी में उन्होंने इस बात का ध्यान ही नहीं रहा कि वन अधिकार अधिकार अधिनियम 13 दिसंबर 2005 के तहत पट्टा वितरण के पात्र और अपात्र में फर्क क्या है? और वहां कितने कब्जाधारी बीस से पच्चीस वर्षों से पुराने उस जगह पर अपना गुज़र बसर कर रहे हैं? इन तमाम बातों पर बिना सोचे समझे उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए वहां से भाग निकलना उचित समझा। कब्जाधारियों द्वारा उसी अवैद्य कब्जा की गई भूमि पर मकान भी अब पूरी तरह से तैयार हो चुकी है, आज दिनांक 24.05.2025 दिन शनिवार को हमारे खबर लिखने तक वन परिक्षेत्र चिरमिरी के द्वारा उक्त अतिक्रमणकारियों पर किसी तरह की कोई कार्यवाही ना तो की गई है और ना ही चिरमिरी रेंज के प्रभारी रेंजर द्वारा वहां के सागौन वृक्षों की कटाई पर अपनी चुप्पी तोड़ी गई है। सवाल यहां पर यह ही खड़े हो रहे हैं कि जब वहां के लोगों ने उन्हें सागौन की अवैद्य कटाई को ले कर साक्ष्य देने की बातें कहीं और वन अमले को अपने साथ ले जा कर सागौन कटाई के साक्ष्य भी सौंपने का दावा करते रहे, फिर क्यों आज वर्तमान समय तक वन विभाग द्वारा वनस्पतियों के निर्मम हत्याओं के मामलों पर गंभीरता नहीं बरती गई और क्यों कोई सख्त कदम नहीं लिया गया? यदि जंगलों के अवैद्य कटाई जैसे अपराधों के मामलों में वन परिक्षेत्र चिरमिरी के प्रभारी रेंजर की कुर्सी पर वर्तमान समय में विराजमान अधिकारी की किसी भी तरह से संलिप्तता नहीं है तो उन्हें इसकी जांच करनी थी?
अब तो देखने वाली बात यहां पर यह होगी कि वन परिक्षेत्र चिरमिरी के जंगलों के इस तरह से किए जा रहे नरसंहार के मामलों पर वन विभाग के उच्च पदाधिकारी किसी तरह की उच्च स्तरीय जांच कर पाने में सफल होते हैं और सख्त कार्यवाही करते हैं, या फिर छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सख्त कार्यवाही मात्र बेबुनियाद ही साबित होती है? और तो और यदि कार्यवाही होती भी है तो क्या मात्र इस गरीब परिवार पर निशाना साधते हुए इनके मकान पर शासन का बुलडोजर चलेगा या फिर कार्यवाही वहां हर एक अवैद्य कब्जाधारियों पर की जाएगी? किसी एक अतिक्रमणकारी पर कार्यवाही को अंजाम दे कर लगाए जा रहे तमाम आरोपों से बचने की पैंतरेबाजी देखने को मिलेगी या फिर वन विभाग निष्पक्ष हो कर वहां के वन भूमि पर कब्जा किए हर एक अतिक्रमणकारी पर बरसेगा? क्योंकि इन तमाम मामलों पर किसी तरह की कोई सख्त जांच नहीं हुई तो यह समझ लेना होगा कि पूरा का पूरा वन विभाग का काला चिट्ठा ऐसे अधिकारी अपने जेब में लिए घूम रहे हैं, कब किसकी पोल खुल जाए, शायद तब ही वन विभाग के बड़े बड़े अधिकारी भी इन पर हाथ डालने से डरते हैं?






Average Rating
More Stories
Singapore News: अचानक बंद हुआ True Fitness जिम, अभिनेत्री Chen Xiuhuan बोलीं- ‘दिल टूट गया’
CG News: केशकाल में लगी देवी-देवताओं की अदालत, भंगाराम माई के दरबार में 35 को सजा!
छत्तीसगढ़ में गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत! PM Awas Yojana Urban की कट-ऑफ डेट बदली