The YUVA WORLD News

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आकाओं को खुश करने जिला कांग्रेस ने रची साजिश, प्लेसमेंट वेतन भुगतान के बहाने स्थानीय नेता बचा रहे है अपनी साख, जिलाध्यक्ष को कहना पड़ा जनता हमसे सवाल पूछती है

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खुद के नेताओं की खुलती पोल को दबाने प्लेसमेंट के बहाने निगम में सांकेतिक धरना करने पहुंचे जिलाध्यक्ष, चरणबद्ध चल रहे काम की जानकारी लगते लौटे बैरन, मंशा राजनीति ऐसे ही नहीं चमकती है, 04 बिंदुओं में छिपी है कांग्रेस के साजिश की ब्लू प्रिंट, सवाल जनता का…

सवाल क्रमांक 1: क्या कारण रहा कि पूर्व के तीनों महापौर, पूर्व सभापति और वर्तमान में प्रतिपक्ष की नेता विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम से रही नदारत

सवाल क्रमांक 2: बीते 05 साल जिस विधायक ने अपने ही पार्टी के सहयोगी मनेंद्रगढ़ विधानसभा विधायक के कामों में लगाते रहे अड़ंगा, वे अपना विधानसभा छोड़कर शहर सरकार के विरोध में चिरमिरी आए

सवाल क्रमांक 3: कांग्रेस से पूर्व मनेंद्रगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष रही नेत्री पर उनके तत्कालीन कार्यकाल में मनेंद्रगढ़ शहर को गर्त में ले जाने के कई आरोप लगे हो, वे छोटे से नगर पालिका को तो संभाल नहीं पाई और विशाल नगर निगम में कमियां गिनाने विरोध प्रदर्शन में हुंकार भरती रही

सवाल क्रमांक 4: जिला संगठन के इन पुरोधा की बात पिछले सरकार में बैठे इनके ही विधायक, महापौर नहीं सुनते रहे और संगठन सत्ता कई फाड़ में नजर आता रहा वही अब सत्ता जाने के बाद उन्हीं नेताओं की वकालत करने की झूठी साजिश का हिस्सा बने

चिरमिरी। बीते सोमवार को 05 साल से मुंह में पट्टी  बांधकर बैठे जिला कांग्रेस संगठन के मुखिया की अगुवाई में निगम कार्यालय के सामने एक सांकेतिक धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस सांकेतिक धरना प्रदर्शन में बीते 05 साल चिरमिरी को कोसने वाले, अपने ही पार्टी के विधायक को नीचा दिखाने के लिए तलवार लेकर खड़े रहने वाले पूर्व विधायक भी शामिल हुए और बोले तो यहां भी कुछ ऐसी बात जो हर किसी को अचरज में डाल दिया।
दरअसल पूर्व विधायक यहां प्लेसमेंट कर्मचारियों के वेतन की बात करने आए थे लेकिन वे शहर सरकार की बात छोड़कर राज्य सरकार की कमियां गिनाने की अनचाही कोशिश करते देखे गए। बात यही नहीं खत्म होती है, इस विरोध प्रदर्शन में नगर पालिका मनेंद्रगढ़ की पूर्व अध्यक्ष भी शामिल हुई जिन पर पिछले पांच साल में शहर को गर्त में ले जाने का आरोप है।

विपक्ष की नेता रही नदारत

कांग्रेसियों द्वारा आयोजित सांकेतिक विरोध प्रदर्शन में पिछले 20 सालों से लगातार निगम में सभापति और प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभाने वाली नेत्री खुद को विरोध प्रदर्शन से दूरी बनाए रही। बताया गया कि जिस जल संकट की समस्या को लेकर कांग्रेस विरोध जताने में लगी थी उसी कांग्रेसी नेत्री, पार्षद के वार्ड में पेयजल आपूर्ति के लिए करोड़ों का काम चल रहा है ऐसे में प्रतिपक्ष की नेत्री कैसे उसी विषय को लेकर विरोध जता सकती थी लिहाजा उन्होंने साजिश के तहत होने वाले विरोध प्रदर्शन से दूरी बनाकर रखी, हालांकि कांग्रेस के नेता खुद पर लगे दाग को छिपाने तथा महिला प्रतिपक्ष नेत्री की गैरमौजूदगी को कुछ और ही बहाना बताकर पल्ला झाड़ते नजर आए।

पूर्व महापौर के डमरू की नहीं बजी धुन और ताल

इस पूरे घटनाक्रम की बारीकियों को गर आप समझे तो आप पाएंगे कि जितने भी कांग्रेस के बड़े नेता शहर सरकार का हिस्सा रहे, वे सभी संगठन के विरोध प्रदर्शन वाली साजिश से खुद को दूर रखे। चिरमिरी नगर पालिक निगम के सबसे चहेते महापौर में एक के0 डोमरू रेड्डी का नाम शामिल होता है जिन्हें चिरमिरी की जनता ने निर्दलीय चुनकर शहर सरकार में बैठाया था, के0 डोमरू रेड्डी एक ऐसे नेता रहे है जो पूर्ववर्ती शहर सरकार के विरोध में अपने ही पार्टी के महापौर और विधायक पर कई गंभीर आरोप लगाते रहे, उन्होंने तो तत्कालीन महापौर पर कमीशनखोरी और विधायक पर अवैध कार्यों में कबाड़, कोयला, कई घोटालों की फेयरिस्ट बाकायदा शिकायत के रूप में कलेक्टर और कांग्रेस के बड़े नेताओं को प्रेषित किए थे, वे भी कार्यक्रम से दूर रहे यानि संगठन के चाहने के बाबजूद भी भाजपा शहर सरकार के विकासमोत्मक सफर में खुद को सम्मलित किए, गरीब का बेटा साजिश की राजनीति से दूर होकर शहर का विकास चुना, यही शहर और शहर के एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि का धर्म और कर्तव्य भी है जिसे पूर्व महापौर के0 डोमरू  ने सहस्त्र स्वीकार किया, जिसे कांग्रेसी और कोई नाम जरूर देंगे।

क्यों होती है बंटी बबली की चर्चा?

चिरमिरी का दुर्भाग्य कहे या कुछ और बीते 05 साल स्थानीय सरकार चलाने का जिम्मा जिनके कंधों पर रहा उन्हें लोगों ने बंटी बबली का नाम दिया। दरअसल इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह रही कि विधानसभा की लाठी हो या निगम की चाभी, दोनों एक ही मकान के पते से निकलती थी, विधायक के क्षेत्र में महापौर की खुशी और महापौर के क्षेत्र में विधायक का स्टंट चिरमिरी ने खूब देखा, पायलट प्रोजेक्ट की तरह चिरमिरी पहुंचे, 05 साल लाठी चलाई, एक ने चाभी घुमाई और फिर चलते बने, इस तरह से बीता 05 साल और उन्हीं के कर्मों को छिपाने के लिए पूरा षडयंत्र रचा गया, लेकिन आप पाएंगे कि इस चर्चित नाम की परछाई भी विरोध कार्यक्रम में नहीं दिखाई दी, यानि जिसने भी सत्ता का स्वाद चखा वे सभी कांग्रेसी नदारत रहे और जिलासंगठन के मुखिया यह सोचकर खुश हो रहे कि पहली बार उनके निमंत्रण में इतने लोग शहर के नेता कम से कम इन विपरीत समय में तो साथ आए, फिलहाल बंटी बबली का नामकरण किसने किया ये तो अज्ञात है ठीक उसी तरह जिस तरह कांग्रेसी बीते 05 साल जयचंद को खोजती रही किंतु बता नहीं पाई कि उनके पार्टी में जयचंद कौन है?

मंत्री के क्षेत्र में विरोध करेंगे तो बात राजधानी तक जाएगी

स्थानीय विधायक व प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मीडिया ने मुखातिब होते हुए संपूर्ण जिले को छोड़कर सिर्फ चिरमिरी – खड़गवां में ही सरकार और स्थानीय एजेंसियों के विरोध में कांग्रेस के हल्ला बोल प्रदर्शन का आयोजन और आपको टारगेट किए जाने पर राय जानी गई तो उन्होंने कहा कि देखिए मुझे क्या टारगेट करेंगे, इनके पास कोई मुद्दा नहीं है, सिर्फ सुर्खियों में बने रहना चाहते है। विपक्ष की सोच है कि मंत्री जी के क्षेत्र में विरोध करे तो, प्रदेश में कुछ हलचल हो। ये केवल पब्लिसिटी और अपने आका को खुश करने के लिए इस प्रकार का काम करते रहते है।

क्या कहता है धारा 21

सरकारी कर्मचारी राजनीतिक पार्टियों का बैनर पोस्टर नहीं लगा सकते हैं और न ही वे राजनीति के प्रचार-प्रसार में जाकर सम्मिलित हो सकते हैं। यह बात सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों में कही गई है, जिनमें सरकारी कर्मचारियों की निष्पक्षता और राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने पर रोक लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक निर्णय में कहा है कि सरकारी कर्मचारी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकते हैं और न ही वे राजनीतिक पार्टियों का प्रचार-प्रसार कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा है कि सरकारी कर्मचारियों को अपनी निष्पक्षता और निष्ठा बनाए रखनी होती है, और राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने से उनकी निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लग सकता है। धारा 21 के संदर्भ में, यह आमतौर पर सरकारी सेवकों के आचरण से संबंधित नियमों और विनियमों को संदर्भित करती है। इन नियमों के अनुसार, सरकारी सेवकों को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने से बचना चाहिए और अपनी निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए। इस प्रकार, सरकारी कर्मचारियों को राजनीतिक पार्टियों का बैनर पोस्टर लगाने और राजनीति के प्रचार-प्रसार में शामिल होने से बचना चाहिए लेकिन कांग्रेस के इस सांकेतिक विरोध प्रदर्शन में एसईसीएल के कई ऐसे कर्मचारी शामिल हुए जो लोक सेवक की श्रेणी में आते है लिहाजा एसईसीएल के कर्मचारियों ने कोर्ट के निर्णय का और धारा 21 का उल्लंघन किया है। माना जा रहा है उक्त विरोध प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों की शिकायत किए जाने पर एसईसीएल उन कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकती है।

लोक सेवक की परिभाषा

लोक सेवक का अर्थ होता है “जनता की सेवा करने वाला”। लोक सेवक वे व्यक्ति होते हैं जो सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र में काम करते हैं और जनता की सेवा करने के लिए समर्पित होते हैं। सरकारी अधिकारी, पुलिस अधिकारी, शिक्षक, स्वास्थ्य सेवक, सामाजिक कार्यकर्ता लोक सेवक के उदाहरण है। लोक सेवकों का मुख्य उद्देश्य जनता की भलाई और कल्याण को बढ़ावा देना होता है, और वे अक्सर सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लोक सेवकों के गुण: जनता के प्रति समर्पण, निष्पक्षता और पारदर्शिता, जवाबदेही और जिम्मेदारी, सेवा भावना और सहानुभूति, लोक सेवक समाज के विकास और प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनकी सेवाएँ समाज के लिए अमूल्य होती हैं।

देबाशीष गांगुली ( ब्यूरो प्रमुख सरगुजा संभाग )

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