रायपुर हाल ही में विधानसभा में RI प्रमोशन का मुद्दा गूंजा, जो पटवारी संघ के पदाधिकारियों की सोची-समझी साजिश का परिणाम बताया जा रहा है। मामला यह है कि परीक्षा का विज्ञापन कांग्रेस शासनकाल में जारी हुआ था, जबकि परीक्षा का आयोजन भाजपा शासन में हुआ। इसी का फायदा उठाकर संघ पदाधिकारियों ने सत्ता पक्ष को गुमराह किया कि यह प्रक्रिया कांग्रेस शासन की है, जबकि विपक्ष को बताया कि यह भाजपा शासन की देन है। परिणामस्वरूप विधानसभा में दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक देखी गई।

असल में संघ के कुछ पदाधिकारियों का चयन परीक्षा के माध्यम से नहीं हो पाया, जिसके चलते उन्होंने परीक्षा को निरस्त करवाकर वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन की मांग की। यदि यह तरीका लागू होता है, तो उन्हीं पदाधिकारियों को लाभ मिलना तय है।
इस साजिश का खामियाजा पूरे तंत्र को भुगतना पड़ रहा है। यदि 216 पटवारी RI के रूप में प्रमोट हो जाते, तो उतने ही पटवारी पद रिक्त होते, जिससे आम लोगों के लिए खुली भर्ती का रास्ता खुलता। लेकिन पदाधिकारियों की दूषित मंशा के कारण यह प्रक्रिया भी ठप पड़ी
है।






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