गरीब परिवार के न्याय की लड़ाई: मोपका में कब्जा विवाद में न्यायालयीय आदेश के बावजूद हो रही है अनदेखी
बिलासपुर, छत्तीसगढ़ | मोपका के एक गरीब परिवार ने अपने पुश्तैनी जमीन से अवैध कब्जा हटाने की वर्षों से जारी कानूनी लड़ाई के बाद अब फिर न्याय की गुहार लगाई है। आवेदक सुरेश, दिनेश, मुकेश, सरस्वती, द्रोपती, नंदनी और गायत्री — सभी स्वर्गीय दशरथ सूर्यवंशी के वारिस हैं, जो ग्राम मोपका (पटवारी हल्का नंबर 19/29) में स्थित खसरा नंबर 1269, रकबा 0.10 एकड़ भूमि के वास्तविक मालिक हैं।
उक्त भूमि पर दो कमरों का मकान और एक खपरैल दुकान भी बनी हुई है, जिस पर कुछ व्यक्तियों — चन्द्रभूषण पिता द्वारिका प्रसाद, ऋषि टर्रे पिता राजू टर्रे और किशोर कुमार टर्रे — द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया है।
परिवार ने बताया कि उन्होंने तहसील न्यायालय में धारा 250 छ.ग. भू.रा.सं. के तहत आवेदन किया था, जिसके बाद अनुविभागीय अधिकारी (रा.) न्यायालय ने पाँच वर्षों की सुनवाई के बाद निर्णय सुनाते हुए बेदखली वारंट जारी किया। लेकिन दुर्भाग्यवश दिनांक 20 अगस्त 2025 तक उक्त आदेश पर रोक लगा दी गई है।
उन्होंने बताया कि महत्वपूर्ण यह है कि न्यायालय ने स्पष्ट रूप से आदेश में उल्लेख किया है कि अनावेदकगण के पास जमीन पर स्वामित्व का कोई वैध दस्तावेज नहीं है और जो दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं, वे “आबादी भूमि” से संबंधित हैं, न कि विवादित खसरा नंबर 1269 से।
परिवार का आरोप है कि उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और न्यायालय की कार्यवाही का दुरुपयोग कर गरीबों पर दबाव बनाया जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार के लिए यह कानूनी लड़ाई अब बोझ बनती जा रही है।
परिवार ने कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि वे आदेश का पालन सुनिश्चित कराएं और अवैध कब्जा हटाकर उन्हें न्याय दिलाया जाए।
रिपोर्ट: The YWN News | बिलासपुर








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