न्यायाधीशों का पहनावा विश्वास का प्रतीक : मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा
Bilaspur, Chhattisgarh | September 27, 2025
वे शनिवार को छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर के विवेकानंद सभागार में आयोजित नव नियुक्त सिविल जज (कनिष्ठ वर्ग) के प्रारंभिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम चरण के समापन अवसर पर संबोधित कर रहे थे। यह प्रशिक्षण 30 जून 2025 से प्रारंभ हुआ था और 26 सितंबर 2025 को संपन्न हुआ।
मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक कार्यप्रणाली में निष्ठा, संवेदनशीलता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि पक्षकारों की न्यायपालिका के प्रति धारणा, न्यायालय में न्यायाधीशों के आचरण से निर्मित होती है, इसलिए शिष्टाचार, समयनिष्ठा और करुणा न्यायिक चरित्र का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश अपने पूरे कार्यकाल में विधि के विद्यार्थी बने रहें क्योंकि विधि निरंतर परिवर्तनशील है।
उन्होंने यह भी कहा कि विनम्रता, नैतिकता और निष्पक्षता न्यायाधीशों का आधार होना चाहिए और संविधान के प्रति समर्पण उन्हें निरंतर प्रेरित करता रहना चाहिए।
गौरतलब है कि तीन माह के इस प्रशिक्षण का उद्देश्य नव नियुक्त सिविल जजों को आधारभूत ज्ञान, व्यावहारिक कौशल एवं न्यायिक दृष्टिकोण से सुसज्जित करना था। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में वैधानिक एवं प्रक्रम संबंधी विधियों, न्यायालयों में तकनीक का उपयोग, नैतिकता तथा समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता जैसे विषयों को शामिल किया गया। साथ ही, प्रभावी न्यायालय प्रबंधन एवं वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्रों पर भी विशेष बल दिया गया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रजनी दुबे, प्रभारी रजिस्ट्रार जनरल, अकादमी के निदेशक, अतिरिक्त निदेशक समेत कई गणमान्य उपस्थित रहे।






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