अरपा कोलवासरी को जमीन देने को लेकर ग्रामीणों सहित जनप्रतिनिधियों ने किया दावा-आपत्ति
मस्तूरी: मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रलिया में अरपा कोल बैनिफिकेशन एंड एनर्जी एलएलपी को रास्ते के लिए शासकीय जमीन आबंटन को लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ ग्रामीणों ने कड़ा विरोध जताया है। शासकीय जमीन खसरा नंबर 206, 28 डिसमिल पर कब्जे की कोशिश को ग्रामीणों ने राजस्व सहिंता 1959 की धारा 248 के तहत अपराध बताते हुए प्रशासन के समक्ष दावा-आपत्ति प्रस्तुत की है।
ग्रामीणों ने बताया कि जनसुनवाई में 95 प्रतिशत लोगों ने कोल वाशरी का विरोध किया था, इसके बावजूद प्रशासन द्वारा जमीन आबंटन की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता मेघनाथ खांडेकर और विवेक शर्मा ने कहा कि निजी लाभ के लिए सरकारी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है जो कि भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।
प्रदूषण और सड़क जर्जर होने की आशंका
ग्रामीणों का कहना है कि पहले से ही एनटीपीसी और अन्य कोल वाशरियों के कारण राखड़, जहरीले पानी और वायु प्रदूषण से खेत और फसल प्रभावित हो रहे हैं। अब यदि एक और नई कोल वाशरी शुरू होती है तो भिलाई, रलिया, बेलटुकरी, गतौरा, जयराम नगर सहित आसपास के गांवों पर प्रदूषण का दोहरा असर होगा।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि पीएम ग्राम सड़क योजना से बनी सड़क की भार क्षमता 10-12 टन है, लेकिन कोल वाशरियों के भारी वाहन 80-90 टन भार लेकर चलते हैं जिससे सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जताया कड़ा विरोध
वरिष्ठ नेता मेघनाथ खांडेकर ने कहा कि “सरकारी जमीन को अरपा कोलवासरी के लिए देने की बात अखबार में प्रकाशित हुई थी। आखिर प्रशासन 95 प्रतिशत विरोध के बाद भी रास्ता क्यों दे रहा है?”
विवेक शर्मा ने कहा, “समस्या एक हो तो बताऊं, जब जनता ने जनसुनवाई में विरोध किया तो बिना स्वीकृति के प्रशासन किस आधार पर रास्ता देना चाहता है। पूरा गांव इसका विरोध करेगा।”
शिकायत करने वालों में प्रमुख रूप से – चंद्रभान चंद्राकर, पायल साहू, सूरज, विवेक शर्मा, देव चंद्राकर, किसान नेता मेघनाथ खांडेकर, आयुष शर्मा, रामेश्वर साहू, बलिराम बघेल, विश्वमढ़ी खांडेकर, विनोद बघेल, रविन्द्र टंडन सहित अन्य ग्रामीण शामिल रहे।






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