रायपुर: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता डॉ. चंद्रशेखर खूंटे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सैनिकों की शहादत के संदर्भ में प्रधानमंत्री के भाषण में इस्तेमाल की गई भाषा पर आपत्ति जताते हुए वीर जवानों के लिए सम्मानजनक शब्दों के प्रयोग की बात कही।
‘जवान देश के लिए मरते नहीं, शहादत देते हैं’
डॉ. खूंटे ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले जवानों के लिए ‘मरना’ नहीं, बल्कि ‘शहादत’ और ‘वीरगति’ जैसे सम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सैनिकों के साहस और बलिदान को राजनीतिक भाषणों या राजनीतिक लाभ-हानि के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “जवान देश के लिए मरते नहीं हैं, वे देश के लिए शहादत देते हैं। फर्क सिर्फ शब्दों का नहीं, सोच और सम्मान का है।” डॉ. खूंटे ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष सैनिकों के नाम पर राष्ट्रवाद की राजनीति करता है, जबकि वीर जवानों की शहादत को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया जाता है।
सैनिकों के सम्मान को राजनीति से ऊपर रखने की अपील
डॉ. खूंटे ने कहा कि सैनिक किसी दल, नेता या सरकार के नहीं, बल्कि पूरे देश के सैनिक हैं। उन्होंने सरकार से सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीद जवानों के परिवारों के कल्याण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि सैनिक सीमा पर देश के लिए अपना जीवन न्योछावर करते हैं, जबकि पुलिस और सुरक्षा बल संविधान एवं कानून के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। दोनों की भूमिकाएं और परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए सैनिकों की शहादत को किसी राजनीतिक या प्रशासनिक उपलब्धि से जोड़ना उचित नहीं है।
डॉ. खूंटे ने प्रधानमंत्री से अपील की कि लाल किले जैसे राष्ट्रीय मंच से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर देश की एकता, संविधान, लोकतंत्र और वीर जवानों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।







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