मरवाही के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली: जिम्मेदार कौन?
ईश्वर प्रसाद | खास रिपोर्ट
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: जिले के मरवाही नगर पंचायत, जो हाल ही में नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त कर चुका है, का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अपनी बदहाल स्थिति के कारण सुर्खियों में है। स्वास्थ्य सेवाओं की दयनीय स्थिति और अव्यवस्था ने यहां के ग्रामीण आदिवासियों की जिंदगी को संकट में डाल दिया है।

स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्था चरम पर
मरवाही का यह स्वास्थ्य केंद्र आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए एकमात्र चिकित्सा सुविधा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मामूली दुर्घटनाओं के मरीजों तक को यहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है, क्योंकि यहां इलाज के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
डॉक्टरों की कमी: अस्पताल में जरूरी चिकित्सकों की तैनाती नहीं है, जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा।
सफाई व्यवस्था बदहाल: अस्पताल परिसर गंदगी से भरा पड़ा है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
पोषण व भोजन की अनदेखी: भर्ती मरीजों को पर्याप्त व पौष्टिक भोजन नहीं मिल रहा, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
निर्माण कार्य में अनियमितता, गुणवत्ता पर सवाल
हमारी टीम ने अस्पताल के अहाते (परिसर) का निरीक्षण किया, जहां निर्माण कार्य जारी है। पहले ही इस पर स्टे लग चुका था, लेकिन अब काम दोबारा शुरू हो गया है। हालांकि, निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ठेकेदार और इंजीनियर की मिलीभगत के कारण घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग इस बदहाल स्थिति को नजरअंदाज कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री के दौरे के दौरान केवल दिखावटी व्यवस्थाएं की जाती हैं, ताकि वास्तविक समस्याएं छिपाई जा सकें।
सरकार और जनप्रतिनिधि बने मूकदर्शक
मरवाही क्षेत्र से चुने गए जनप्रतिनिधि और सत्ता में बैठे नेता इस बदहाली पर चुप्पी साधे हुए हैं। जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी केवल चुनावी वादों तक सीमित रह गई है।
सरकार आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा तो करती है, लेकिन मरवाही जैसे पिछड़े इलाकों में यह दावे खोखले साबित हो रहे हैं। यदि इसी तरह की लापरवाही जारी रही, तो जनता आगामी चुनावों में इसका जवाब जरूर देगी।
अब सवाल यह उठता है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस समस्या का समाधान करेंगे, या फिर जनता को अपनी किस्मत के भरोसे छोड़ दिया जाएगा?
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